मथुरा के एक गांव में दिनदहाड़े बंदूक की नोंक पर दो युवकों द्वारा अनुसूचित जाति की महिला से किए गए दुष्कर्म के मामले में पीड़िता को 28 वर्ष बाद न्याय मिल सका। गोवर्धन के एक गांव में हुई घटना के अभियुक्तों को अदालत ने सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। निर्णय के बाद दोनों को जेल भेजा गया है।
घटना 9 मई 1994 की है। गोवर्धन क्षेत्र के एक गांव निवासी युवक हरी व प्रेम पीड़िता तथा उसके पति को खेत से भूसा ले जाने के लिए बुलाकर ले गए। पति भूसा लेकर घर आ गया लेकिन उसकी पत्नी को बीच रास्ते में पकड़कर बंदूक की नोक पर दुष्कर्म किया। महिला के साथ मौजूद बच्चों ने इसकी जानकारी पति को दी। पति ने जब थाने से रिपोर्ट दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने नहीं सुनी। बाद में न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई। लंबी न्यायिक जंग के बाद महिला को 28 वर्ष बाद बुधवार को न्याय मिल सका। केस की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट मनोज कुमार मिश्रा ने अभियुक्त हरी व प्रेम को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सनाई है। विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद शर्मा ने बताया कि अदालत ने सजा के साथ-साथ दोनों पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
ये भी पढ़ें - Agra University: शुरू होते ही हैंग हो गया आगरा विवि का सर्वर, फिर चला कछुआ चाल
जवान से हो गए बुजुर्ग
न्यायिक प्रक्रिया इतनी लंबी चली कि जो अभियुक्त जवान थे, अदालत का निर्णय आते-आते बुजुर्ग हो गए। जिस समय उन पर घटना का आरोप लगा था तब वह युवक थे। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि पहले तो एफआईआर होने में ही परेशानी हुई थी। बाद में जब न्यायालय के आदेश से रिपोर्ट दर्ज हुई तो अभियुक्तगण हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। वर्तमान में दोनों अभियुक्त लगभग 65-65 वर्ष के हैं।