फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिला महिला अस्पताल से प्रसूता को भगाया, घर ले जाते वक्त गेट पर प्रसव

Tue, 13 Aug 2019 01:25 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
जिला अस्पताल के गेट पर प्रसव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
लेडी लॉयल (महिला जिला अस्पताल) से गर्भवती महिला को वापस भेज दिया गया। घर ले जाते वक्त प्रसव पीड़ा होने पर पति रास्ते में पड़े जिला अस्पताल में पत्नी को लेकर पहुंचा। गेट में घुसते ही प्रसव होने लगा। आनन-फानन में पर्दा लगाकर महिला चिकित्सक ने प्रसव कराया। 
विज्ञापन

 
मूल रूप से मध्यप्रदेश के निवासी किशोरी लाल सदर में बेलदारी का कार्य करते हैं। उसकी पत्नी रानी (20) साढ़े आठ माह से गर्भवती थीं। सुबह 12 बजे के करीब प्रसव पीड़ा होने लगी। किशोरी लाल पत्नी को लेकर करीब एक बजे लेडी लॉयल पहुंचे।

यहां के स्टाफ ने जांच कर रानी में रक्त की कमी बताकर प्रसव कराने से मना कर दिया। कहा कि यहां प्रसव नहीं हो पाएगा, प्राइवेट हॉस्पिटल में लेकर चले जाओ। 
विज्ञापन


पति किशोरी लाल और देवरानी सविता डॉक्टरों के आगे गिड़गिड़ाते रहे कि उनके पास रुपये नहीं हैं। यहीं भर्ती कर लो, रक्त का इंतजाम कर लेंगे। लेकिन डॉक्टर नहीं माने और जबरन उनको बाहर निकाल दिया। एंबुलेंस मंगवाने की बात कही तो फटकार दिया।
 

मजबूरी में किशोरी ऑटो करके पत्नी को सदर स्थित साइट पर ले जाने लगा। प्रतापपुरा चौराहा पर तबियत बिगड़ते देख वह जिला अस्पताल में पत्नी को लेकर पहुंचा। यहां के स्टाफ ने कहा कि अस्पताल में प्रसव की व्यवस्था नहीं है। लेडी लॉयल लेकर जाओ।

पति ने बताया कि वहां भर्ती नहीं किया है। इतने पर ही रानी की हालत बिगड़ने लगी। वह जमीन पर बैठ गई। वार्ड ब्वाय ने इसकी जानकारी इमरजेंसी में डॉ. सुनील यादव को दी। वह आए तो देखा कि रानी का प्रसव हो रहा है। 

तत्काल उन्होंने नर्सिंग स्टाफ से चारों ओर पर्दा लगवा दिए और महिला चिकित्सक को बुलवाया। डॉ. मिथिलेश मौर्य ने प्रसव कराया। रानी ने बेटे को जन्म दिया है। किशोरी लाल ने डॉक्टरों का आभार जताया। जच्चा-बच्चा को लेडी लायल रेफर कर दिया गया है।  

 
विज्ञापन

खून की कमी होने पर मिलता है निशुल्क रक्त
जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर गर्भवती महिला में रक्त कम होने पर इसकी व्यवस्था अस्पताल प्रशासन ही करता है। लेकिन लेडी लॉयल प्रशासन ने रक्त की व्यवस्था न करते हुए मरीज को भगा दिया। 

लेडी लॉयल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ.आशा शर्मा का कहना है कि रक्त की कमी बताते हुए गर्भवती का प्रसव नहीं कराने का मामला गंभीर है। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को नोटिस दिया जाएगा। लापरवाह स्टाफ की प्रमुख सचिव को रिपोर्ट भेजूंगी। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने सराहनीय कार्य किया है, लेकिन लेडी लॉयल में गर्भवती को भर्ती नहीं कराया इसकी रिपोर्ट एसआईसी से मांगकर शासन को भेजी जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें