तेंदुओं की खाल के साथ पकड़े थे तस्कर।
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तेंदुए के शिकार और उसकी खाल की तस्करी के मामले में मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) के जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। इस दौरान मौके से वन्यजीव एसओएस की गाड़ी जब्त की गई है, जो फिलहाल एसटीएफ की कस्टडी में है। जांच में सामने आया है कि भगवान सिंह और उसके साथियों ने इसी गाड़ी से शिवपुरी और मुरैना के आसपास के जंगलों में रेकी की थी। इसके बाद हरियाणा से मंगाए गए लेग-होल्ड ट्रैप को चुनिंदा स्थानीय शिकारियों तक पहुंचाया गया।
मध्य प्रदेश के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन समीता राजौरा ने बताया कि 17 अगस्त को एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण को नोटिस भेजा गया था लेकिन वह पेश नहीं हो सके। अब दूसरा नोटिस भेजा जाएगा। वहीं, वन्यजीव एसओएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने जांच अधिकारी के सामने उपस्थित न होने का कारण अपनी मां की तबीयत खराब होने का हवाला दिया था।
इसी मामले में 13 अगस्त को दिल्ली से वन्यजीव एसओएस के स्पेशल प्रोजेक्ट डायरेक्टर वसीम की भी मध्य प्रदेश एसटीएफ ने गिरफ्तारी की थी। इसके बाद संगठन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इससे पहले एमपी एसटीएसएफ ने 11 अगस्त को व्यापारी भगवान सिंह उर्फ सलीम को गिरफ्तार किया था। उन्हीं दोनों की गिरफ्तारी के बाद वाइल्डलाइफ एसओएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कार्तिक सत्यनारायण का नाम सामने आया था।
कॉपर वायर नहीं लेग-होल्ड ट्रैप का हुआ था इस्तेमाल
मध्य प्रदेश के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन समीता राजौरा ने बताया कि तेंदुओं के शिकार में लेग-होल्ड ट्रैप का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले करीब 10 वर्षों में शिकार के लिए लेग-होल्ड ट्रैप का इस्तेमाल नहीं किया गया। जांच में सामने आया कि भगवान सिंह ने ही हरियाणा लेग-होल्ड ट्रैप एमपी के स्थानीय शिकारियों को उपलब्ध कराए थे।
तीन राज्यों से जुड़ा मामला, न्यायालय की अनुमति जरूरी
मामला तीन राज्यों से जुड़ा होने के कारण पकड़े गए अन्य दो आरोपियों से पूछताछ के लिए जिला वन अधिकारी आगरा न्यायालय से अनुमति लेंगे। जिला वन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद ही आरोपियों से पूछताछ की जाएगी।
वाइल्डलाइफ एसओएस ने खारिज किए आरोप
वाइल्डलाइफ एसओएस ने संगठन और कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। संगठन ने आरोपों को दुर्भावनापूर्ण अभियान बताते हुए कहा कि इससे देश में वन्यजीव अपराध के खिलाफ चल रही मुहिम और वन्यजीव संरक्षण के काम पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। एनजीओ के सीईओ एवं सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि संगठन पिछले 32 वर्षों से वन विभाग और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है और हर जांच में सहयोग के लिए तैयार है।
संगठन ने कहा कि वन्यजीव अपराधों की जानकारी देने और जांच एजेंसियों की मदद करने वाले संरक्षणकर्मियों को ही संदिग्ध माना गया तो इससे भविष्य में लोग ऐसी जानकारियां साझा करने से हतोत्साहित हो सकते हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस के मुताबिक, उसने 19 राज्यों में काम करते हुए 5.31 लाख से अधिक जानवरों को बचाने में मदद की है।
ये था मामला
23 जुलाई, 2026 को वन विभाग व एनजीओ वाइल्डलाइफ एसओएस , आगरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 10 तेंदुए की खाल के साथ 4 तस्करों की गिरफ्तार किए थे। जांच के दौरान इस पूरे मामले के तार मध्य प्रदेश के शिवपुरी, मुरैना व हरियाणा से जुड़े मिले। इसके बाद एमपी एसटीएसएफ और स्थानीय वन विभाग की टीम ने संयुक्त अभियान चलाकर 9 लोगों की गिरफ्तारी की थी।