यूं तो हाथी एक जंगली जानवर है लेकिन अपनी बुद्धिमत्ता और सीखने की अद्भुद क्षमता का खामियाजा इसे इंसान की कैद और उनकी प्रताड़ना सहकर चुकाना पड़ता है। रामनगर, उत्तराखंड में ऐसे ही एक युवा हाथी मोती को उसके महावत ने इतना प्रताड़ित किया कि वह एक बार गिरा तो फिर अपने पैरों पर खड़ा ही नहीं हो सका। कोई और हाथी मोती न बने, इसके लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस ने मुहिम शुरू की है। 2030 तक भिक्षावृत्ति में लगाए गए 300 हाथियों को मुक्त कराने का लक्ष्य तय किया गया है।
वाइल्ड लाइफ एसओएस भारत ने यूएसए वाइल्ड लाइफ एसओएस के साथ मिलकर पांच चरण में पूरे देश से भिक्षावृत्ति में लगे हाथियों को मुक्त कराने के अभियान की शुरुआत की है। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण बताते हैं कि हाथियों की दुर्दशा को ध्यान में रखते हुए अभियान शुरू करने का निर्णय लिया।
डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी ने बताया कि हाथियों को रेस्क्यू करने के लिए एंबुलेंस से लेकर प्रशिक्षित लोग और अस्पताल तक सारी व्यवस्था हैं। सचिव गीता शेषमणि ने बताया अभियान के 5 चरणों में रेस्क्यू के साथ आउटरीच, रोकथाम, शिक्षा और प्रशिक्षण आदि शामिल है। इसके लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस ने आमजन के लिए एलीफैंट हेल्पलाइन नंबर 91 9971699727 जारी किया है। जहां कॉल कर कोई भी व्यक्ति भीख मांगते हाथियों की सूचना दे सकता है। इस नंबर पर कोई भी व्यक्ति व्हाट्सएप पर वाॅइस मैसेज सुझाव भी दे सकता है।