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मुहब्बत की नगरी में 'लिव इन रिलेशन' से टूटते परिवार, दो साल में बढ़े तीन गुना ऐसे मामले

Tue, 25 Jun 2019 02:27 PM IST
मुकेश कुमार रंजना शर्मा, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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गैरों पर करम, अपनों पर सितम..। मुहब्बत की नगरी आगरा में पिछले कुछ वर्षों से ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। पत्नी के रहते दूसरी औरत से ‘लिव-इन’ की हद तक मुहब्बत की प्रवृत्ति शादीशुदा लोगों में देखी जा रही है। उपेक्षित-प्रताड़ित ऐसी पत्नियों की गुहार आशा ज्योति केंद्र पहुंच रही हैं। 
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ताजनगरी के पुरुषों का पराई औरतों से प्रेम वर्षों की जमी-जमाई गृहस्थी उजाड़ रही है। यही नहीं, शहर में ऐसे शादीशुदा लोगों के ‘लिव इन रिलेशनशिप’ के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। आशा ज्योति केंद्र के आंकडे़ गवाह हैं। 

वर्ष 2017 में ऐसी लगभग 25 शिकायतें केंद्र के पास पहुंचीं, जिनमें पुरुष शादीशुदा होने के बाद भी दूसरी महिलाओं के संपर्क में हैं। यह संख्या 2018 में 37 हुई तो इस साल जून तक 80 हो चुकी है। ऐसे मामलों के दो साल में तीन गुना तक बढ़ोतरी पर महिला आयोग ने गहरी चिंता भी जताई है। 
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ये मामले आ चुके हैं सामने

केस 1
थाना न्यू आगरा के युवक की शादी 11 साल पहले वहीं की युवती के साथ हुई थी। दोनों के दो बच्चे हैं। पति उत्तराखंड में नौकरी करते हैं। वहां वो किसी महिला के संपर्क में आए। तीन साल से उसी के साथ रह रहे हैं। तभी से पत्नी और बच्चों का खर्च भी नहीं उठाता। कभी आगरा आया भी तो पत्नी के साथ मारपीट करता है।

केस 2 
थाना शाहगंज निवासी युवक की शादी चार साल पहले युवती से हुई थी। एक बच्चा है। मोबाइल पर दूसरी औरत से शुरू हुई बातचीत अब साथ रहने तक पहुंच गई है। पति की नौकरी सरकारी है लेकिन अब पत्नी को एक रुपया भी नहीं देते, यहां तक कि मारपीट भी करता है।
 
केस 3
सिकंदरा के युवक ने कोई तीन साल पहले अपनी गर्भवती पत्नी को घर से निकाल दिया। वो मायके और पति अपने ही घर में उस दूसरी औरत के साथ रह रहे हैं जिससे संबंध के बाद उनकी गृहस्थी में उथल-पुथल शुरू हुई थी। दूसरी औरत से उनके दो बच्चे भी हैं। 

महिला आयोग ने जताई चिंता

उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित का कहना है कि यह चिंता का विषय है। इसके लिए महिला और पुरुष दोनों ही जिम्मेदार हैं पर जांच कराने के बाद लगभग सभी मामलों में पुरुषों को ही दोषी पाया गया। 

आशा ज्योति केंद्र में बताया गया कि ऐसे मामलों में गहन काउंसलिग की जरूरत होती है। घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के मामलों में तो बस तीन ही काउंसलिग की जाती है लेकिन ऐसे मामलों में पांच से छह बार काउंसिलिंग की जाती हैं ताकि दोनों ही महिलाओं को न्याय मिल सके।   

आशा ज्योति केंद्र की काउंसर प्रियांजलि मिश्रा ने बताया कि इस तरह के मामलों से दोनों ही महिलाओं की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। इसके लिए सामाजिक प्रयास तो हों ही, कानून भी सख्त होना चाहिए। 

मनोचिकित्सक डॉ दिनेश राठौर का कहना है कि एक-दूसरे को वक्त न दे पाने से रिश्ते टूट रहे हैं। कोई तीसरा वक्त देने लगे तो उसका साथ पाने के लिए आदमी फिर किसी की परवाह नहीं करता है। 
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उत्पीड़न का केस कर सकती है पत्नी 

लिव इन के ऐसे मामलों में पत्नी कानूनी रूप से क्या कर सकती है? उसके अधिकारियों पर एडीजीसी मधु शर्मा से बात की गई। 
सवाल : अगर पति, पत्नी को छोड़कर किसी और महिला के साथ लिव इन में रह रहा हो, तो पत्नी कानूनी रूप से क्या कार्रवाई कर सकती है? 
जवाब : बालिग महिला या पुरुष का लिव इन में रहना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। हां, पत्नी चाहे तो उत्पीड़न का केस कर सकती है, क्योंकि यह
उसका मानसिक उत्पीड़न है। 
सवाल : क्या सिर्फ उत्पीड़न का ही केस किया जा सकता है? पत्नी का गुजारा कैसे होगा? 
जवाब : गुजारे के लिए खर्च का केस किया जा सकता है। इतना ही नहीं। केस लड़ने के लिए खर्च का अलग से केस किया जा सकता है। 
सवाल : अगर महिला पति को छोड़कर किसी और मर्द के साथ लिव इन में हो तो कानूनी रूप से पति क्या कर सकता है? 
जवाब : पति चाहे तो उत्पीड़न का केस कर सकता है। 
 
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