उत्तर प्रदेश का जिला एटा, जिसे समाजवादी पार्टी का मिनी गढ़ भी माना जाता है। यहां समाजवादी पार्टी के कई ऐसे नेता हैं, जिनके सीधे संबंध सैफई परिवार से हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भइया यहां से वर्तमान में सांसद हैं। हालांकि उनसे पूर्व इस सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा। बहुजन समाज पार्टी को इस सीट पर कभी कामयाबी नहीं मिली। तुलसी, खुसरो की सरजमीं एटा में अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शनिवार सुबह जा पहुंचा। यहां की जनता के मन में क्या है? इस पर बात हुई तो मतदाताओं ने खुलकर अपने मन की बात कही।
दिनेश चंद पालीवाल ने कहा कि एटा में मोदी की तरफ जा रहा है रुख, प्रत्याशी को नहीं देख रहे हैं। 10 साल हो गए लेकिन रेलवे की व्यवस्थाएं नहीं सुधरी। मतदाता शास्त्री ने बताया कि इस बार का चुनाव समझ नहीं आ रहा है। क्योंकि दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने प्रत्याशी बनाए हैं, उनका कोई विजन समझ नहीं आ रहा है। आजादी के 70 साल बाद भी यहां साइंस की फैकल्टी नहीं है। ये एटा का दुर्भाग्य है। मयंक उपाध्याय ने बताया कि एटा में मेडिकल कॉलेज बना और रेलवे लाइन डलवाई गई है। भाजपा सांसद ने बहुत काम किया है।
एक अन्य मतदाता ने बताया कि एटा में एक सफेद हाथी को बांध दिया गया है। ये सफेद हाथी एटा मेडिकल कॉलेज है। ऐसा मेडिकल कॉलेज है, जहां न तो इलाज की सही व्यवस्था है और नाहीं दवाएं मिलती हैं। अखिल ने मयंक उपाध्याय पर हमला करते हुआ कहा कि ये रेलवे की बात करते हैं। कह रहे हैं कि अब धरातल पर रेल आएगी। मजे की बात ये है जब जमीन के लिए अधिग्रहण ही नहीं हुआ है तो रेलवे लाइन का हवा में बिछेगी। वहीं मोहन चौहान ने कहा कि सांसद दिखाई नहीं देते हैं। जब चुनाव आता है तभी दिखाई देते हैं। कभी उनके आवास पर जाओ तो भी मुलाकात नहीं हो पाती है। सपा के प्रत्याशी भी जो मैदान में हैं वो भी बाहर के हैं।