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Agra News: पहले जहां था हाईकोर्ट, अब वहां खंडपीठ का इंतजार; वकीलों ने जोरदारी से उठाई मांग

Thu, 01 Aug 2024 03:03 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में पहले जहां हाईकोर्ट था। अब वहां खंडपीठ का इंतजार किया जा रहा है। वकीलों ने जोरदारी से इसकी मांग उठाई है। 
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बैठक में मौजूद अधिवक्ता गण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में दीवानी में बुधवार को जनमंच ने बैठक की। अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन ने सदन में हाईकोर्ट खंडपीठ की स्थापना आगरा में कराने की मांग उठाकर सराहनीय कार्य किया है। लोकसभा में दोनों सांसदों ने अब तक ऐसी मांग नहीं उठाई है। तय किया कि अधिवक्ता तीन अगस्त को आगरा आगमन पर रामजीलाल सुमन का स्वागत करेंगे।

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यह भी तय हुआ कि जो जनप्रतिनिधि हाईकोर्ट खंडपीठ के मुद्दे पर आवाज नहीं उठा रहे हैं, उनके घर के बाहर ढोल बजाकर उन्हें नींद से जगाने का काम किया जाएगा। अध्यक्षता जनमंच के अध्यक्ष चौधरी अजय सिंह और चौधरी धर्मवीर सिंह ने की। पवन गुप्ता, सत्येंद्र कुमार यादव, हृदेश कुमार यादव, अमर सिंह कमल, विनय अग्रवाल, फूल सिंह चौहान, डाॅ. राजकुमार, उमेश दीक्षित, चौधरी विशाल सिंह, सतीश शाक्य, अजय शर्मा आदि मौजूद रहे।

अधिवक्ताओं के विचार, मांग पूरी होनी चाहिए

खंडपीठ आगरा का हक है। दशकों से आगरा के अधिवक्ता जनता के साथ संघर्ष कर रहे हैं। यह मांग अब पूरी होनी चाहिए। -करतार सिंह भारती, वरिष्ठ अधिवक्ता
 

सरकार कदम नहीं उठा रही

हाईकोर्ट में आगरा मंडल की सबसे ज्यादा केस लंबित हैं। सरकार सस्ते सुलभ न्याय का नारा तो देती है, लेकिन इस और कोई कदम नहीं उठा रही है। -चौधरी अजय सिंह, संयोजक, जनमंच
 

वादकारियों को मिलेगा लाभ

इलाहाबाद हाईकोर्ट के बाद लखनऊ में एक बेंच है। वह सिर्फ सरकारी मामले देखती है। इसके अलावा यूपी में एक भी बेंच नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेंच की अत्यंत आवश्यकता है। इसकी स्थापना से गरीब वादकारियों को लाभ मिलेगा। -सुभाष बाबू परमार, अध्यक्ष, आगरा बार एसोसिएशन
 

बेंच स्थापना तक आंदोलन

40 साल से आंदोलन करते आ रहे हैं। वर्ष 2001 में पूर्व प्रधानमंत्री की फरह में आयोजित सभा में भी आवाज उठाई थी। जब केरल में हाईकोर्ट बेंच बन सकती है तो आगरा में क्यों नहीं बन सकती। बेंच स्थापना तक आंदोलन जारी रहेगा। -ओपी सिंह, अध्यक्ष, डॉ. आंबेडकर बार एसोसिएशन
 
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1 जुलाई से पहले की घटना

पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड ने बताया कि मामले में घटना का दिनांक 1 जुलाई से पहले का है। इस कारण आईपीसी में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस संबंध में हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा। जिन मामलों में अपराध भारतीय न्याय संहिता के लागू होने से पहले हुआ है, उनमें भारतीय दंड संहिता के तहत ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इस संबंध थाना प्रभारी और एसीपी को निर्देशित किया गया है।
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