बृहस्पतिवार रात को मौसम खेत में खड़ी गेहूं की फसल के लिए मुसीबत बन गया। रात में तेज हवा के साथ हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल खेतों में ही बिछ गई। इसके साथ ही किसानों की छह महीने की मेहनत पर भी पानी फिर गया। प्रशासन ने अब तक गेहूं में हुए नुकसान का आंकलन कराने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
जिले में बड़े पैमाने पर किसान गेहूं की खेती करते हैं। इन दिनों गेहूं की फसल लगभग तैयार हो चुकी है। लेकिन मौसम किसानों के लिए मुसीबत बना हुआ है। मार्च के शुरू में जहां खराब मौसम ने किसानों को परेशान किया तो वहीं एक बार फिर से बदला मौसम फसलों के लिए नुकसान का कारण बन रहा है।
बृहस्पतिवार रात को 11 बजे करीब तेज हवा के साथ जिले भर में बारिश हुई। कृषि विज्ञान केंद्र पर 2.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश के चलते गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। किसानों का कहना है कि इससे गेहूं का दाना काला हो जाएगा और उत्पादन भी कम होगा। इसके साथ ही जहां गेहूं की कटाई का काम शुरू हो गया है, वहां भी फसलों में नुकसान की आशंका है।
वहीं जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्यप्रताप सिंह का कहना है कि हवा के साथ बारिश के चलते गेहूं की फसल गिरी तो है, लेकिन अभी नुकसान नहीं है। अगर आगे भी बारिश होती है तो नुकसान होने की आशंका है।
संकट के बादल छटने की है उम्मीद
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को संकट के बादल छटने के संकेत दिए हैं। मौसम वैज्ञानिक नरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि 31 मार्च को जिले में ओलावृष्टि की आशंका था। लेकिन अब 31 मार्च का दिन गुजरने के बाद मौसम साफ हो सकता है। इससे किसानों को राहत मिल सकती है।
किसानों की बात
फसलें जब तैयार होती हैं तो मौसम खराब होने के कारण नुकसान होता ही है। लेकिन इस बार किसान पहले से ही आलू मेें बाजार की मार झेल रहा है। ऐसे में गेहूं में नुकसान झेलना संभव नहीं है।
-जोगेंद्र सिंह, हरिहरपुर।
गेहूं की फसल बारिश और हवा के कारण खेतों में ही गिर गई है। इससे गेहूं का दाना बदरंग हो जाएगा। साथ ही कटाई पर भी अधिक खर्च आएगा। सरकार को नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।
-मोहनलाल, खरपरी।