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व्हाट्सएप के नए नियम: जानें क्या है 'सिम बाइंडिंग', हर हरकत पर रहेगी पुलिस की नजर; साइबर ठगों की आएगी आफत

Mon, 02 Mar 2026 07:54 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

नई ‘सिम बाइंडिंग’ गाइडलाइन से अब व्हाट्सएप के जरिए होने वाली साइबर ठगी पर लगाम कसने की तैयारी है। होली के मौके पर सक्रिय ठगों से बचने के लिए पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करने की अपील की है।
 
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व्हाट्सएप - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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साइबर अपराधी कभी निवेश तो कभी नौकरी का झांसा देकर ठग रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर खातों में रकम जमा करा रहे हैं। आरोपी धोखाधड़ी के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं। पुलिस को व्हाट्सएप नंबर मिल भी जाए तो भी पकड़ना आसान नहीं होता। मगर अब नए नियम से न सिर्फ गिरफ्तारी में आसानी होगी बल्कि पीड़ितों की रकम भी वापस दिलाने में मदद मिलेगी।
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केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक, जिस मोबाइल नंबर से आपने व्हाट्सएप अकाउंट बनाया है, वही सिम मोबाइल में सक्रिय होना चाहिए। सिम नहीं है, या सक्रिय नहीं है तो सर्विस बंद हो जाएगी। नया नियम एक मार्च से लागू होना था। इस नई व्यवस्था को सिम बाइंडिंग कहा जा रहा है। आगरा पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2025 में साइबर ठगी की 209 और जनवरी व फरवरी में 31 प्राथमिकी दर्ज की गईं। इनमें ज्यादातर मामले व्हाट्सएप की मदद से धोखाधड़ी के थे। अपराधी नाममात्र के पकड़े गए।

एडीसीपी क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए फर्जी दस्तावेज़ से लिए गए सिम और खातों का प्रयोग करते हैं। जिस स्थान का सिम होता है, उस स्थान पर व्हाट्सएप अकाउंट नहीं होता है। भारत से बाहर भी व्हाट्सएप संचालित हो रहा होता है। वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का भी प्रयोग किया जाता है। ऐसे में अपराधी को पकड़ना आसान नहीं होता है। नई व्यवस्था से अपराधियों को पकड़ने में आसानी होगी।

 

केस-1
अकोला, कागारौल निवासी बिजेंद्र सिंह चाहर को कमीशन का लालच देकर 11 लाख रुपये ठग लिए गए थे। उन्हें 17 दिसंबर को व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। ग्रुप पर ऑनलाइन लिंक भेजकर खाते में रकम ट्रांसफर करा ली गई।

 

केस-2
खंदारी निवासी प्रमोद कुमारी सिंह को डिजिटल अरेस्ट कर 33 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। उन्हें व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल किया गया। पुलिस अधिकारी बनकर धमकाया गया। पुलिस जांच में पता चला कि वाईफाई का प्रयोग कर व्हाट्सएप चलाया जा रहा था।

 

केस-3
हनुमान नगर, एत्माद्दौला निवासी शैलेंद्र कुमार यादव के नंबर को 4 जनवरी को एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। पार्ट टाइम जॉब के नाम पर 11 लाख रुपये अलग-अलग खाते में जमा करा लिए गए। आरोपी व्हाट्सएप पर बात किया करते थे।

 
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होली पर भी हैं सक्रिय, झांसे में नहीं आएं
एडीसीपी ने बताया कि त्योहार पर साइबर अपराधी ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। ऑफर का लालच देते हैं। रिवॉर्ड पॉइंट दिलाने की बात करते हैं। निवेश का झांसा देते हैं। ऑनलाइन टिकट, होम डिलीवरी के नाम पर ठगी करते हैं। परिचित और मित्र बनकर कॉल करते हैं। खातों में रकम जमा करा लेते हैं। किसी के झांसे में नहीं आएं। अनजान व्यक्ति रकम की मांग करता है तो कॉल काट दें। अनजाने लिंक पर क्लिक नहीं करें। एपीके फाइल डाउनलोड नहीं करें। पुलिस, सीबीआई और कस्टम अधिकारी बनकर कोई डिजिटल अरेस्ट करने की बात करता है तो समझ जाएं कि ठगी होने वाली है। कॉल काट दें। किसी तरह की साइबर ठगी होने पर 1930 पर कॉल करें।
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