जिस दिसंबर माह की पहचान कड़ाके की ठंड और घना कोहरा है, उसमें इस बार सर्दी नहीं पड़ रही। पांच वर्षों में यह सबसे गर्म दिसंबर है। पारा सामान्य से छह डिग्री सेल्सियस ज्यादा चल रहा है। आलम यह है कि दोपहर को थोड़ा तेज चलना पड़ जाए तो पसीने छूट जाते हैं। मौसम विज्ञानी भी दिसंबर की गर्मी से हैरत में हैं।
दिसंबर का महीना 33 साल पहले सबसे ज्यादा गर्म रहा था, जब 2 दिसंबर 1987 को तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था। तब से लेकर अब तक यह रिकॉर्ड कायम है। तीन साल पहले दिसंबर में पारा 26 डिग्री तक पहुचा था, लेकिन इस बार 10 दिसंबर को अधिकतम तापमान 28.4 डिग्री तक पहुंच गया जो सामान्य से चार डिग्री ज्यादा है। यह पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा तापमान रहा है।
न्यूनतम तापमान में दिसंबर का महीना रिकॉर्ड बना चुका है। 94 साल पहले 28 दिसंबर 1926 को पारा माइनस में 0.6 डिग्री तक रहा है। दिसंबर में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 1997 में है, जब 86 मिमी बारिश ने दिसंबर को भिगो दिया था और लोग मानसून की तरह हुई बारिश में दांत किटकिटाते हुए पूरे 15 दिन तक रहे।
10 दिसंबर का तापमान
साल अधिकतम न्यूनतम
2020 28.4 14.2
2019 23.0 10.4
2018 23.8 9.0
2017 26.0 8.7
2016 19.2 10.2
दो दिन बाद तापमान में कमी के आसार
मौसम विभाग के मुताबिक बृहस्पतिवार को तापमान सामान्य से 4 डिग्री ज्यादा 28.4 और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री ज्यादा 14.2 पर रहा। 12 दिसंबर के बाद तापमान में कमी के आसार हैं। सुबह हल्का कोहरा और धुंध छाई रह सकती है, वहीं न्यूनतम तापमान में गिरावट के आसार रहेंगे।
पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहना मुख्य कारण
मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्ता ने बताया कि इस बार सामान्य से ज्यादा तापमान है। इसके लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। इनमें मुख्य पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) है। इसके सक्रिय रहने के कारण सर्द हवा नहीं चल पाई है। इसके निकलने के बाद मैदानी क्षेत्रों में तापमान में गिरावट होने लगेगी। 12 दिसंबर के बाद तापमान में कमी का और कोहरे का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
आलू को हो सकता है नुकसान
दिसंबर के महीने में गर्मी के कारण आलू की पैदावार पर असर पड़ने की आशंका है। आलू किसान विकास समिति के प्रदेश महासचिव पुष्पेंद्र जैन के मुताबिक तापमान 5 से 6 डिग्री ज्यादा होने से आलू का कद छोटा रह सकता है। पत्तियां और तना तो इस तापमान में बढ़ेगा, लेकिन मिट्टी में नीचे दबा कंद नहीं फल-फूल पाएगा। इसका साइज कम ही रह सकता है। आलू को सर्दी की जरूरत पड़ती है।
बढ़ सकते हैं वायरल फीवर के मरीज
एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर आशीष गौतम ने कहा कि दिन में पारा ज्यादा है और रात को अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में वायरल फीवर के मरीज बढ़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि दिन की गर्मी देख कई लोग रात को भी गर्म कपड़े नहीं पहनते या फिर ठंडा पानी पी लेते हैं, इससे खांसी, गले में खराश हो जाती है।