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मौसम की बेरुखी से सूखे के आसार

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मैनपुरी। मौसम की बेरुखी ने अब लोगों को डराना शुरू कर दिया है। मई का महीना जहां सूखा चला गया, वहीं जून में भी औसत से कम बारिश हुई। ऐसे में सूखे के आसार नजर आने लगे हैं। वहीं तापमान अब भी 40 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है, जो लोगों की परेशानी का कारण है।
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मई में प्री मानसून की बारिश शुरू हो जाती है। इससे लोगों को बीच-बीच में गर्मी से राहत मिल जाती है। किसानों को भी खेतों में जुताई और बुवाई का मौका मिल जाता है, लेकिन इस बार पूरा मई का महीना सूखा ही निकल गया। प्रशासन के आंकड़े के अनुसार जिले में कहीं भी पूरे महीने एक बूंद नहीं गिरी। जबकि जून माह में भी बीते वर्षों की अपेक्षा गिरावट दर्ज की गई।
जून 2017 से अगर तुलना करें तो इस बार लगभग तिहाई बारिश ही हुई है। ऐसे में धान की बुवाई के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। अगर ऐसा ही मौसम रहा तो इस बार सूखे जैसे हालात हो सकते हैं। एक ओर बारिश नहीं हो रही है, ऊपर से तापमान भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जून के अंत में भी तापमान 40 डिग्री के पार बना हुआ है। अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई तो धान की पौध बर्बाद होना तय है।
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किसानों को सता रही चिंता
मौसम का मिजाज देखकर किसानों को भी चिंता सता रही है। बारिश कम होने की चिंता को लेकर उनकी रातों की नींद उड़ गई है। इसके पीछे एक बड़ा कारण है मैनपुरी में धान की खेती। मैनपुरी में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। धान की फसल में पानी की अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे में बारिश न होने पर किसानों की आधी फसल तो सिंचाई में ही चली जाएगी। ऐसे में उन्हें क्या बचेगा।
विशेषज्ञ की राय
कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी बताते हैं कि इस बार मौसम विभाग ने अच्छी बारिश की उम्मीद जताई है। हालांकि ये बारिश देरी से हो सकती है। इसलिए किसानों को बहुत अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर बारिश नहीं होती है तो मैनपुरी के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। दरअसल धान की फसल में प्रत्येक सप्ताह पानी की जरूरत पड़ती है। अगर किसान निजी नलकूप से सिंचाई करेंगे तो प्रतिबीघा फसल की एक बार सिंचाई का दो सौ रुपये खर्च आएगा। ऐसे में कुल दस सिंचाई का लगभग दो हजार रुपये प्रतिबीघा का खर्च आ जाएगा और किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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