मैनपुरी। पिछले दो साल से स्थानांतरण की उम्मीद देख रहे जिले के राजकीय कॉलेजों में तैनात शिक्षक- शिक्षिकाओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। विभाग से जारी स्थानांतरण नीति के बाद 98 प्रतिशत शिक्षक आवेदन प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं। स्थानांतरण के लिए जारी की गई जटिल शर्तें पूरी करना उनके लिए मुसीबत बन गया है।
जिले के राजकीय कॉलेजों में बड़ी संख्या में बाहरी जनपद से सहायक अध्यापक और प्रवक्ताओं की तैनाती है। बड़ी संख्या में वे शिक्षक जनपद में तैनात हैं जिनकी नियुक्ति अगस्त 2020 में हुई थी। इन शिक्षकों को उम्मीद थी कि उन्हें स्थानांतरण नीति का लाभ मिल सकेगा। लेकिन महानिदेशक स्कूली शिक्षा की तरफ से शासन को भेजी गई प्रस्तावित स्थानांतरण नीति ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
स्थानांतरण नीति में स्पष्ट किया गया है कि वह शिक्षक ही स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे जिनकी नियुक्ति मार्च 2020 से पहले की है। इसके अतिरिक्त इंटर कॉलेज में चार प्रवक्ताओं की तैनाती होने पर पांचवां ही स्थानांतरण का लाभ ले सकेगा। हाईस्कूल स्तर पर तीन प्रवक्ताओं की तैनाती जरूरी है। तीन के बाद यदि चौथा प्रवक्ता तैनात है तो वह स्थानांतरण प्रक्रिया में लाभ ले सकता है। इन शर्तों के बाद जनपद से स्थानांतरण चाहने वाले 98 प्रतिशत प्रवक्ता और सहायक अध्यापक स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।
60 प्रतिशत परीक्षा परिणाम जरूरी
इसके साथ ही महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने राजकीय कॉलेजों की स्थानांतरण नीति में अन्य बिंदु भी शामिल किए हैं। । इसके अनुसार उन स्कूलों से ही प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों को स्थानांतरण किया जाएगा, जिनका पिछले तीन साल का परीक्षा परिणाम 60 प्रतिशत या इससे अधिक है। इससे कम बोर्ड परीक्षा परिणाम वाले कॉलेजों के प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों को भी स्थानांतरण प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल सकेगा।
स्थानांतरण नीति के अनुसार ही शिक्षक- शिक्षिकाएं आवेदन कर सकेंगे। शासन के जो भी निर्देश होंगे उनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। - मनोज कुमार वर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक