नगर निगम ने सड़कों पर पानी के छिड़काव के लिए 16 वाहनों का टेंडर करीब 50 लाख रुपये प्रतिमाह में दिया है, जबकि अपने संसाधनों से यही काम अधिकतम 7.20 लाख रुपये में हो सकता था। सात गुना ज्यादा खर्च के इस टेंडर पर पार्षदों ने सवाल उठाते हुए इसे निरस्त कर निगम के कर्मचारियों और वाहनों से ही छिड़काव कराने की मांग की है।
आगरा की सड़कों पर धूल नियंत्रण और डिवाइडर पर लगे पौधों को पानी देने के लिए चलाए गए 16 वाहनों को सात गुना ज्यादा कीमत पर टेंडर दिया गया। नगर निगम अपने संसाधनों से अपने ही वाहनों को चलाता तो हर माह सीएनजी और ड्राइवर का वेतन मिलाकर कुल 7.20 लाख रुपये अधिकतम खर्च होते, जबकि टेंडर के जरिये 50 लाख रुपये प्रतिमाह का खर्च निगम को उठाना पड़ रहा है।
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भाजपा पार्षद दल उपनेता प्रकाश केसवानी ने कहा कि नगर निगम तत्काल पानी के छिड़काव का टेंडर निरस्त करे और अपने संसाधनों से पानी का छिड़काव कराने की व्यवस्था करे। निगम ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती की है। उन्हीं में से 16 ड्राइवरों के जरिये अपने वाहन चलवाए।
भाजपा पार्षद रवि माथुर के मुताबिक पानी का छिड़काव कराने के मामले में टेंडर उद्यान विभाग की जगह सहायक नगर आयुक्त ने किया, जबकि वह अधिकृत नहीं थे। कोई कमेटी नहीं बनाई गई जो पानी के छिड़काव कराने वाले वाहनों का रेट तय करती। विशेषज्ञों की कमेटी ही यह तय कर सकती थी। जो सात गुना रेट तय किए गए, वह किस आधार पर बने, यह भी नहीं बताया गया है।
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बसपा पार्षद कप्तान सिंह ने कहा कि पर्यावरण के लिए यह काम होना था लेकिन इसमें भी घोटाला कर लिया गया है। यह व्यवस्था तत्काल खत्म होनी चाहिए। मानसून के चार महीनों में स्प्रिंकलर की जरूरत ही नहीं है तो पानी के छिड़काव के भारी भरकम बिल का भुगतान क्यों किया जाय?