जल संस्थान महाप्रबंधक की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। जलकर और विकास शुल्क में घोटाले उजागर होने के बाद अब पार्षदों ने टेंडर में हुए ‘खेल’ को उजागर किया है। उन्होंने शहर के पेयजल एवं सीवरेज की समस्याओं के निस्तारण के लिए आठ करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर चहेते ठेकेदारों को देने का आरोप लगाया है। इस संबंध में कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की है।
पार्षद हेमंत प्रजापति के नेतृत्व में पार्षदों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को कमिश्नर प्रदीप भटनागर से मिला। इनका आरोप था कि जल संस्थान महाप्रबंधक द्वारा नियमों को ताक पर रखकर टेंडर आवंटित किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि आगरा में होने वाले टेंडर के विज्ञापन अलीगढ़ में छपवाए गए। ताकि स्थानीय ठेकेदारों को इसकी जानकारी न हो सके और महाप्रबंधक अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर आवंटित कर दें। जबकि 22वें अधिवेशन की बैठक में महापौर और नगर आयुक्त ने महाप्रबंधक को निर्देशित किया था कि सभी निविदाओं का प्रकाशन नियमानुसार समाचारों पत्रों में प्रकाशित कराएं। साथ ही पार्षदों ने ठेकेदारों के पंजीकरण में भी हेराफेरी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कुछ ठेकेदारों के आवेदन अनुभव, टर्नओवर आदि कारण बताते हुए निरस्त कर दिए गए। जबकि जल संस्थान द्वारा उन फर्मों से कई वर्षों से कार्य कराए जा रहे हैं एवं लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान भी किया गया। इसके बावजूद इनका पंजीकरण नहीं किया गया। पार्षदों ने ऐसी ही तमाम गड़बड़ियों के संबंध में कमिश्नर को साक्ष्य प्रस्तुत किए। कमिश्नर ने पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल में राहुल चतुर्वेदी, रवि माथुर, प्रेमा वर्मा, मोहन सिंह लोधी आदि मौजूद थे।
महापौर करेंगे टेंडर निरस्त
पार्षद प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन की एक प्रति महापौर इंद्रजीत सिंह आर्य को भी सौंपी। साथ ही उन्होंने 30 जनवरी को जल संस्थान में हुए टेंडरों में भी हेरफेर होने का अंदेशा जताया। इस पर महापौर ने इस टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि नगर आयुक्त और महाप्रबंधक को मंगलवार को पत्र लिखकर टेंडर प्रक्रिया निरस्त करने के बारे में आदेशित करेंगे।