लखनऊ में मिलावटी खून बेचने का गिरोह पकड़ में आने के बाद एसटीएफ ने प्रदेश भर में जांच शुरू कर दी है। आगरा में भी ये खेल लंबे समय से चल रहा है। ड्रग विभाग ने जन सुविधा चेरीटेबिल ब्लड बैंक में खेल पकड़ा था। नशे के आदी लोग निशाने पर हैं।
जिले में 18 ब्लड बैंक हैं, इसमें दो सरकारी हैं। हर महीने करीब 10 हजार यूनिट रक्त मरीजों के इलाज में उपयोग के लिए दिया जाता है। लखनऊ में एसटीएफ ने मिलावटी रक्त बनाने का गैंग पकड़ा है। यह प्रति यूनिट 3500 रुपये में बेच रहे थे। आगरा में भी ड्रग विभाग ने अगस्त में मोती कटरा स्थित जन सुविधा ब्लड बैंक में रक्त बेचने का खेल पकड़ा था। ड्रग विभाग ने ब्लड बैंक सील करते हुए लाइसेंस निलंबित कर दिया था।
रक्त बेचने वालों में सबसे आगे नशे के आदी लोग रहते हैं। ये अपने शरीर से एक यूनिट ब्लड एक से दो हजार में बेच देते हैं। रक्त माफिया जरूरतमंद मरीज को तीन से पांच हजार रुपये में बेचते हैं। सहायक आयुक्त औषधि शिवशरण सिंह ने बताया कि सभी ब्लड बैंक की चरणबद्ध जांच की जा रही है। जन सुविधा ब्लड बैंक में ब्लड बेचने का खेल पकड़ा था। इसका लाइसेंस निलंबित कर दिया है।
रक्त की कराई जाएगी जांच
एसटीएफ ने लखनऊ में मिलावटी रक्त पकड़ा है। इसमें शातिर रक्त की एक यूनिट में केमिकल मिलाकर दो यूनिट तैयार करते थे। इस बड़े खुलासे के बाद ड्रग विभाग ऐसी संभावना पर रक्त का नमूना लेकर मेडिकल कालेज में विशेषज्ञों से जांच कराएगा। अभी किसी लैब में रक्त की जांच की सुविधा नहीं है।