- सती सावित्री की कथा सुन किया जाएगा दान-पुण्य
आगरा। वट अमावस्या पर बृहस्पतिवार को महिलाएं वट वृक्ष का पूजन कर पति के सुखद भविष्य और लंबी आयु की कामना करेंगी। वट अमावस्या का पूजन सती सावित्री के पति प्रेम से जुड़ा है। उन्होंने यमराज से वरदान लेकर अपने पति को उससे मुक्त करा लिया था। इस मौके पर उनके पति प्रेम, अटल निश्चय, त्याग की महिमा का गुणगान किया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि मान्यता के अनुसार वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और डालियों व पत्तों में भगवान शिव का वास होता है। इस वृक्ष की बहुत सारी शाखाएं नीचे की तरफ झुकी होती हैं, इसमें देवी सावित्री का वास माना जाता है। इसलिए वट वृक्ष की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
एसे करें पूजन
इस दिन महिलाएं नए वस्त्र धारण करके शृंगार करती हैं। पांच तरह के फल और पकवान थाली में सजाकर वट वृक्ष के नीचे पूजा करती हैं। वट वृक्ष पर पांच या सात बार हाथ में कलावा लेकर वृक्ष को लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं। वटवृक्ष को जल प्रदान करके रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प से पूजा करके सत्यवान और सावित्री की कथा मनोयोग से सुनती और सुनाती हैं। प्रार्थना करती हैं कि उनके पति दीर्घायु हों, वे सदैव सुखी और सानंद रहें। पूजन के बाद खरबूज आदि फल अपने बुजुर्गों का भेंट किए जाते हैं। मंदिरों में भी दान-पुण्य किया जाता है।
शुभ मुहुर्त
वट पूजन का शुभ मुहूर्त बृहस्पतिवार को सुबह 6:23 बजे से लेकर पूर्वाह्न 11:15 तक रहेगा। गुरुवार के दिन रोहिणी नक्षत्र, गजकेसरी योग, शिवराज योग, बुध आदित्य योग, पंचग्रही योग, मालव्य योग रहेगा। सूर्य और चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे।
कटते वृक्षों से बदला स्वरूप
अब वट वृक्ष शहर में बहुत कम हो गए हैं। बाग-बगीचों में ही कहीं दिख जाते हैं। इस वजह से महिलाएं बाजार से पेड़ की शाखाएं या पत्ते मंगाकर पूजन कर लेती हैं।