चैतन्य कुटी में हुई संतों की बैठक
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मथुरा के वृंदावन में परिक्रमा मार्ग स्थित चैतन्य कुटी में गुरुवार को संतों की बैठक में तीर्थनगरी में बाहर से आए लोगों द्वारा खुद को महामंडलेश्वर घोषित कर संत समाज की गरिमा को पहुंचाई जा रही ठेस पर नाराजगी जताई। संतों ने कहा कि प्रशासन को ऐसे लोगों को चिन्हित कर जांच करानी चाहिए। ऐसे लोग समाज में प्रचार-प्रसार कर जनभावना को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे लोग अपना व्यक्तिगत लाभ ले रहे हैं। उनका समाज में कोई रचनात्मक कार्य नहीं है।
महामंडलेश्वर नवल गिरि ने कहा कि स्वयंभू महामंडलेश्वर नहीं होते। महामंडलेश्वर अखाड़े के होते हैं। धर्मेंद्र गिरि जो अपने को महामंडलेश्वर के साथ आचार्य और गोस्वामी लिख रहे हैं, ये गलत है। वे क्या हैं इसे स्पष्ट करें। महामंडलेश्वर बनना है तो किसी अखाड़े के बनें। चतु: संप्रदाय के महंत फूलडोल बिहारी दास ने धर्मेंद्र गिरि के उस बयान पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने 8 अगस्त को 18 लाख नागा साधुओं के साथ काशी की ज्ञानवापी मस्जिद जाकर पूजा करने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि अगर धर्मेंद्र गिरि 100 नागा साधुओं को ही एकत्रित कर लें तो वह उन्हें एक लाख रुपये देंगे। राम स्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि नेताओं में धर्म निरपेक्ष बनने की भगदड़ मची थी। वह भगदड़ ऐसे महापुरुषों में मची है। मृगतृष्णा पालकर रहने वाले ऐसे लोग धर्म मार्ग से जोड़ने की संतों की परंपरा को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। बैठक में चितप्रकाशानंद महाराज, महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देवजू महाराज, महंत मोहिनी बिहारी, बाल योगी ईश्वरचंद, महामंडलेश्वर आदित्यानंद्र लक्ष्मणदास, रामप्रियादस आदि थे।