कहते हैं कि कुंभ साधना और तप के लिए बने हैं। यहां आने वाले साधु घोर तप और साधना कर मनुष्य और विश्वकल्याण की कामना करते हैं। वृंदावन कुंभ में भी ऐसे कई साधु और संत आए हैं, जो यहां साधना और तप कर रहे हैं। ऐसे ही 85 वर्षीय महंत मदनमोहन दास हैं।
निंबार्क संप्रदाय से जुड़े संत मदनमोहन दास की वर्ष 1998 में वृंदावन में लगे कुंभ के दौरान महंताई की रस्म हुई थी। इसके बाद वह हर कुंभ में यहां आकर घोर साधना कर रहे हैं। उनकी इस साधना में बढ़ती उम्र के साथ ढलती काया आड़े ना आए, इसके लिए वह योगासन भी करते हैं।
वृंदावन कुंभ के दौरान हर दिन घंटों ध्यान लगाए रखते हैं। युगल उपासाना में अष्टयाम सेवा में किसी प्रकार का विघभन न हो, इसका पूरा ध्यान रखते हैं। कई बार रात में सोते भी नहीं। उन्होंने कहा कि इस पावन धरा पर सोने के लिए नहीं आए हैं।
यहां तो जितना भजन इस काया से हो जाए, उतना कम है। हम बड़े भाग्यशाली हैं जो वृंदावन की इस भूमि में आकर ठाकुरजी का नाम लेने का अवसर प्राप्त हुआ है, नहीं तो बड़े-बड़े देवता वृंदावन की धरा के लिए तरसे हैं।