प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना किसी दबाव या लालच के बालिग स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन और विवाह का निर्णय लेता है तो यह उसका सांविधानिक अधिकार है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने आगरा निवासी सगी बहनों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर की। साथ ही अगली सुनवाई पर 6 अगस्त को दोनों को पेश करने का आदेश दिया है।
याचिका में दोनों बहनों ने कहा कि उन्होंने इच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया है। साथ ही अपनी पसंद के व्यक्तियों से शादी करना चाहती हैं। आरोप है कि पिता ने इसका विरोध कर झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई है। साथ ही पुलिस से मिलीभगत कर दोनों को बंधक बनाकर रखा है।
कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया दोनों लड़कियां बालिग हैं। उन्हें अपनी आस्था, विवाह, निवास और भविष्य से जुड़े निर्णय स्वयं लेने का कानूनी अधिकार प्राप्त है। ऐसे मामलों में कोर्ट का पहला दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा से निर्णय ले रहा है या किसी प्रकार की अवैध हिरासत में है।
कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को आदेश दिया है कि दोनों को छह अगस्त को समक्ष पेश किया जाए, ताकि बातचीत कर उनकी इच्छा और वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सके। यह भी कहा है कि यदि निर्धारित तिथि पर दोनों को पेश नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर कारण बताना होगा।
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ये था मामला
कमिश्नरेट पुलिस ने धर्मांतरण के मामले का खुलासा 19 जुलाई 2025 को किया था। सदर की रहने वाली सगी बहनें मार्च 2025 में लापता हो गई थीं। पुलिस ने दोनों की तलाश की। दावा किया गया कि वो धर्मांतरण गिरोह के चंगुल में फंस गईं। पुलिस ने कोलकाता के तपसिया इलाके से दोनों को ढूंढ़ निकाला था। साथ ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें आगरा का रहमान कुरैशी, मुजफ्फर नगर का अब्बू तालिब, गोवा की आयशा उर्फ एसबी कृष्णा, कोलकाता के अली हसन उर्फ शेखर, ओसामा, देहरादून का अबुर रहमान, जयपुर का मोहम्मद अली, जुनैद कुरैशी, दिल्ली का मुस्तफा उर्फ मनोज और जयपुर का मो. इब्राहिम शामिल था। प्रकरण के खुलासे पर आगरा पुलिस की शासन ने पीठ भी थपथपाई थी। सगी बहनों को परिजन के सुपुर्द किया गया था। बाद में चार और आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। मामले में अब भी कार्रवाई जारी है।
विदेशी फंडिंग की बात आई थी सामने
पुलिस ने खुलासा किया था कि सगी बहनों को कश्मीर बुलाकर जाल में फंसाया गया था। उन्हें दिल्ली से कोलकाता भेज दिया गया था। इसके लिए विदेश से फंडिंग की जा रही थी। कनाडा में रहने वाला सय्यद दाऊद इस काम में लगा था। पुलिस ने उसके मध्य प्रदेश स्थित घर की कुर्की की थी। पूर्व में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद दिल्ली के अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल सहित तीन को गिरफ्तार किया गया था। रिमांड पर आरोपियों से पता चला था कि जाल में फंसे युवक और युवतियों को ऐसे स्थान पर ले जाया जाता था, जहां उनके धर्म की कमियों को बताया जाता था। मुस्लिम धर्म अपनाने पर अच्छाइयों को बताते थे। जो लोग धर्मांतरण करते थे, उन्हें नया नाम दिया जाता था।