विसरा परीक्षण की एक जुलाई को बदली व्यवस्था को विधि विज्ञान प्रयोगशाला में शुक्रवार से सख्ती से लागू किया जाएगा। अगर किसी जनपद से जार में विसरा भेजा जाता है तो उसे लैब से लौटा दिया जाएगा। लैब के दायरे में आने वाले सभी 28 जिलों के एसएसपी और सीएमओ को पहले ही अवगत करा दिया गया है कि अब विसरा वाइल में भेजने होंगे। इससे परीक्षण जल्दी होगा और आसानी से भी। इसे रखने में भी मुश्किल नहीं होगी।
प्रदेश की तीनों बड़ी विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं आगरा, लखनऊ और वाराणसी में एक जुलाई से विसरा परीक्षण विधि बदल दी गई थी। लेकिन आगरा लैब में अभी तक एक भी विसरा नई व्यवस्था पर नहीं आया है। जैसे पहले जार में लीवर, किडनी, आंत के टुकड़े भेजे जा रहे थे, वैसे ही अभी तक आ रहे हैं।
28 अगस्त को लैब के मुआयने पर आए आईजी तकनीकी सेवा पीसी मीणा ने इस पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि अब जार में विसरा न लिए जाएं। लखनऊ लैब के निदेशक डाक्टर श्याम विहारी उपाध्याय ने सभी जनपदों के एसएसपी और सीएमओ को रिमाइंडर भेजकर कहा कि विसरा वाइल में ही भेजे जाएं। इसका भी असर नहीं हुआ तो सख्ती का निर्णय लिया गया। आगरा लैब के संयुक्त निदेशक डाक्टर अतुल कुमार मित्तल ने निर्देश दिए हैं कि शुक्रवार से जार में विसरा न लिया जाए।
वाइल में भेजना होगा
विसरा में अब लीवर, किडनी और आंत के टुकड़े भेजने की जरूरत नहीं है। पोस्टमार्टम के बाद शव से सिर्फ दस दस मिलीग्राम ब्लड और यूरिन तथा 20 मिलीग्राम गैस्ट्रिक कंटेंट्स भेजना है।
आधे समय में होगी जांच
जार से विसरा आने पर पहले आस्वन करके (अंगों को उबालकर) आस्वित (अब्सट्ैक्ट) बनाया जाता है। इसके बाद विष का परीक्षण हो पाता है, जबकि यूरिन, ब्लड और गैस्ट्रिक कंटेट्स में सीधे परीक्षण हो सकता है। इसमें आधा समय लगता है।
28 जिलों के लिए है निर्देश
आगरा लैब के दायरे में मेरठ, मुरादाबाद, झांसी, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़ मंडल के 28 जनपद आते हैं। नई व्यवस्था सभी लैब में लागू की जा रही है।