07एमएनपी-01-शहीद वीरेंद्र यादव का फाइल फोटो।
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मैनपुरी। असम राइफल्स के जवान वीरेंद्र सिंह का ड्यूटी के दौरान कई बार उग्रवादियों से आमना-सामना हो चुका था। चार साल पहले हुए हमले में एक गोली उनके सिर को छूकर निकली थी। उस समय भी वीरेंद्र ने उग्रवादियों को करारा जवाब दिया था।
शहीद वीरेंद्र सिंह यादव के सबसे छोटे बेटे दीपक यादव ने बताया कि करीब चार साल पहले भी उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। उस समय पिताजी और उनके साथियों ने उग्रवादियों के हमले का करारा जवाब दिया था। एक गोली वीरेंद्र सिंह यादव के सिर से रगड़ती हुई निकली थी। उनके सिर में नौ टांके आए थे। इस घटना के बाद से परिजन चाहते थे कि वह वीआरएस ले लें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ समय बाद ही वह ड्यूटी पर लौट गए।
एक साल से घर नहीं आए थे वीरेंद्र
वीरेंद्र सिंह के छोटे पुत्र दीपक यादव के अनुसार, पिताजी एक साल से घर नहीं आए थे। विगत वर्ष वह दिवाली पर घर आए थे। इस बार भी उन्होंने दिवाली घर आने की बात कही थी। उन्होंने वादा किया था कि वह बीस अक्तूबर के आसपास घर आएंगे और दिवाली परिवार के साथ मिलकर मनाएंगे।
एक घंटा पहले जाना था परिवार का हालचाल
अरुणाचल प्रदेश में उग्रवादी हमले में शहीद वीरेंद्र सिंह यादव ने हमले से एक घंटे पहले पत्नी मुकेश देवी से फोन पर बात की थी। फोन पर उन्होंने घर परिवार का हालचाल लिया और दिवाली पर घर आने की बात कही। बेटे के अनुसार, पापा ने मां से कहा कि अभी ड्यूटी पर जा रहा हूं, ड्यूटी खत्म होते ही बात करूंगा। इसके कुछ ही देर बाद पापा के शहीद होने की जानकारी मिली।