ओपीडी कक्ष के बाहर लगी मरीजों की भीड़। -संवाद
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में सोमवार को ओपीडी में 3359 मरीज आए। पर्चे के लिए धक्कामुक्की हुई। घंटेभर में मरीजों को इलाज मिल सका। सबसे ज्यादा मरीज वायरल बुखार, मांशपेशियों में दर्द, खांसी, खराश के हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इस बार वायरल बुखार का स्वरूप बदला मिल रहा है। अधिकतर मरीजों को बुखार हल्का है लेकिन कमर-पैरों और मांसपेशियों में दर्द अधिक है। खांस-खांस के फेफड़ों का दम निकला जा रहा है।
मेडिसिन विभाग के डॉ. मनीष बंसल ने बताया कि मेडिसिन विभाग में 650 मरीज आए। इस बार मरीज में अधिकतम 102 फाॅरेनहाइट बुखार आ रहा है, लेकिन पैरों, कमर, गर्दन और मांसपेशियों में दर्द अधिक हो रहा है। तेजी से कमजोरी आ रही है। खांसी अधिक है और गले में खराश से निगलने में भी दिक्कत हो रही है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. नीरज यादव ने बताया कि ओपीडी में 225 मरीज आए। इनको बुखार के साथ गले में दर्द, खराश के चलते नींद नहीं आ रही। बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। बीते दिनों के मुकाबले डेढ़ गुना मरीज बढ़ गए हैं।
सिरप की मनमानी पड़ रही भारी
वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि मनमाने सिरप और ओवरडोज से टीबी, सांस और खांसी के मरीजों की हालत खराब हो रही है। कफ सिरप दो तरह के होते हैं, एक खांसी रोकने वाले और दूसरा खांसी बढ़ाने वाला। बलगम जकड़ने वाले को खांसी बढ़ाने वाला सिरप देते हैं, जिससे बलगम पिघलकर बाहर आ जाता है और फिर मरीज को आराम मिलने लगता है। बिना बलगम वाले को खांसी रोकने वाला सिरप लिखते हैं। कई बार मरीज गलत सिरप पीने से मर्ज बढ़ा लेता है।
ये करें:
- ठंडी सामग्री, बाजार के भोजन, तले भोजन से बचें।
- बुखार-खांसी होने पर खुद को क्वारंटीन कर लें।
- गुनगुना पानी पीएं, फल खाएं, पौष्टिक भोजन लें।
- शिशुओं को खिलाने से पहले परिजन हाथों को साफ करें।
- घर में रखी बुखार की दवा, सिरप बिना डाॅक्टरी परामर्श के न लें।