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Agra News: नकली, नशे की दवाओं के मामले में जेल में ही एक साल रहेगा विजय गोयल

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आगरा। नकली और नशे की दवाओं की बिक्री के मामले में आरोपी विजय गोयल और उसके मैनेजर नरेंद्र शर्मा अभी जेल में ही रहेंगे। दोनों के खिलाफ एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने स्वापक औषधियों और मन: प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम (पीआईटीएनडीपीएस) के तहत कार्रवाई की है। इसमें एक वर्ष तक जेल में रहना पड़ेगा। जमानत भी नहीं मिल सकेगी। इस एक्ट में पहली बार कार्रवाई की गई है।
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जुलाई 2023 में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने सिकंदरा और बिचपुरी क्षेत्र में नकली-नशीली दवाओं की दो फैक्टरी पकड़ी थीं। इस पर आइकॉन सिटी, मघटई निवासी विजय गोयल, नरेंद्र शर्मा सहित सात लोगों को जेल भेजा था। जेल से रिहा होकर आरोपी विजय गोयल ने दोबारा नकली-नशीली दवाएं बना रहा था।
सिकंदरा के औद्याेगिक क्षेत्र में नकली दवाओं की फैक्टरी खोल रखी थी। अक्तूबर 2024 में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने कार्रवाई की थी। दवा माफिया विजय गोयल, उसके मैनेजर नरेंद्र शर्मा सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। तब से आरोपी जेल में बंद है।
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एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स आगरा जोन के पुलिस उपाधीक्षक उमेश पंवार ने बताया कि मामले में थाना सिकंदरा में केस दर्ज हुआ था। विवेचना एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स मेरठ स्थानांतरित की गई थी। नशे की दवाओं के बड़े मामलों में पीआईटी के तहत कार्रवाई की जाती है जिससे आरोपी पर शिकंजा कसा जा सके।
पीआईटीएनडीपीएस एक्ट 1988 उन नशे का कारोबार करने वाले अपराधियों पर लगाया जाता है, जो लगातार वही अपराध करते हैं। ऐसे अपराधियों का जेल में बंद रहना जरूरी होता है। इसमें आरोपी के खिलाफ एक से अधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है।
इस एक्ट में आरोपी की एक वर्ष तक जमानत नहीं हो पाती है। नए प्रावधान में जेल में बंद रखने की अवधि को 2 वर्ष तक किया जा सकता है। उधर, टास्क फोर्स ने 10 महीने बाद दिल्ली के रहने वाले वांछित अभिषेक बोस को गिरफ्तार किया था। वह नकली और नशे की दवाओं को बनाने वालों को कच्चे माल की सप्लाई करता था। उसकी तलाश में कई दिन से टीम लगी थी।
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