उत्तर प्रदेश के आगरा और फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों की जीत ने साबित कर दिया कि आगरा अभेद्य दुर्ग बन गया है। आगरा में जहां भाजपा प्रत्याशी की जीत एकतरफा रही तो फतेहपुर सीकरी में कड़ा संघर्ष करना पड़ा। हालांकि फतेहपुर सीकरी और आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट से चाहर को निर्णायक बढ़त हासिल हुई।
आगरा लोकसभा क्षेत्र के आगरा उत्तर, आगरा दक्षिण, आगरा छावनी, एत्मादपुर और जलेसर (एटा) विधानसभा सीटों पर भाजपा काबिज है। इस सीट से केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने एक बार बढ़त बनाई तो किसी राउंड में पीछे नहीं हुए।
एत्मादपुर में हल्का विरोध नजर आया था मगर नतीजों में यह विरोधाभास नहीं दिखा। जलेसर में जरूर वह सात राउंड तक पिछड़े। उन्हें हर विधानसभा में बढ़त हासिल हुई, जो बड़ी जीत का कारण बनी।
इस बार सपा के सुरेश चंद्र कर्दम के प्रदर्शन ने भी चौंकाया और वह मुख्य मुकाबले में शामिल रहे, लेकिन किसी राउंड में टक्कर लेने की स्थिति में नजर नहीं आ सके।आगरा लोकसभा सीट पर कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी।
फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर मौजूदा सांसद राजकुमार चाहर को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। उन्हें बाह, फतेहाबाद, खेरागढ़ विधानसभाओं से वैसा समर्थन नहीं मिल सका, जिसकी उम्मीद थी। इन तीनों विधानसभाओं में भाजपा के विधायक काबिज हैं।
वहीं फतेहपुर सीकरी विधानसभा के विधायक चौधरी बाबूलाल ने सांसद के खिलाफ बगावत करके अपने बेटे को निर्दल मैदान में उतारा था मगर सीकरी की जनता ने चाहर पर भरोसा जताया। आगरा ग्रामीण से विधायक व कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य की प्रतिष्ठा यहां दांव पर लगी थी। चाहर को इसी विधानसभा से आखिरी राउंडों में निर्णायक बढ़त हासिल हुई।
ग्रामीण विधानसभा में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं को अपने पाले में शामिल करने का फायदा भी चाहर को मिला। इस तरह आगरा की दोनों सीटों पर जीत हासिल करके भाजपा ने अपने किले को सुरक्षित रखा और सपा-कांग्रेस गठबंधन किले में सेंध नहीं लगा सका।