संभागीय परिवहन विभाग को वाहनों की वजह से परिवार के क्लेश भी झेलने पड़ रहे है। हर माह दो से तीन मामले गाड़ियों को बेचने और स्थानांतरण कराने के विवाद कार्यालय में आते हैं। अधिकतर लोग एक-दूसरे के रिश्तेदार होते हैं। वाहन बेचने की प्रक्रिया अधिक कठिन नहीं होने की वजह से विवाद अधिक उत्पन्न होते है।
कोई भी वाहन स्वामी दो फॉर्म पर हस्ताक्षर कर अपना वाहन आसानी से बेच सकता है। वाहन बेचने के बाद आरटीओ में नए वाहन स्वामी का नाम दर्ज होता है। कई बार वाहन बिक्री के मामले आरटीओ अधिकारियों के सिरदर्द बन जाते है। कार्यालय में केवल वाहन स्वामी के हस्ताक्षर और फोटो का मिलान होता है। सबसे अधिक परेशानी वाहन स्वामी की मौत के बाद खड़ी होती है। उसके बाद वाहन का असली वारिस तय करना आसान नहीं होता है। कई बार दलाल और बाबुओं की सेटिंग से गलत तरीके से वाहन बेच दिए जाते है। जब मामला सामने आता है, तो संबंधित फाइल को गायब कर दिया जाता है।
आरसी में नॉमिनी की सुविधा
ऐसे विवादों के मद्देनजर शासन के स्तर से कुछ साल पहले नए वाहन की आरसी में नॉमिनी का नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। वाहन खरीदने वाला अपने खून के रिश्ते वाले किसी भी व्यक्ति या महिला का नाम नॉमिनी के रूप में दर्ज करा सकता है। इससे उसकी मौत के बाद नॉमिनी को वाहन बेचने में कोई मुश्किल नहीं होगी। यह जानकारी लोगों को वाहन डीलर कम देते हैं, जिसकी वजह से दिक्कत खड़ी होती है। एआरटीओ (प्रशासन) विनय कुमार सिंह ने बताया कि पुराने वाहन बेचने पर विवाद के कई मामले सामने आते हैं। इसलिए प्रक्रिया में कुछ बदलाव किया गया है। अब वाहन बेचने वाले के साथ उसके अन्य दावेदारों से लिखित में लिया जा रहा है। इससे बाद में कोई विवाद खड़ा न हो।
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मां-बेटी-दामाद के बीच हो गया क्लेश
केस-1
सदर क्षेत्र की मां-बेटी और दामाद में लग्जरी गाड़ी को लेकर ठन गई है। पिछले दिनों मां और बेटी आरटीओ पहुंचे और एआरटीओ के सामने समस्या रखी। मां के नाम एक कार है, जो उन्होंने बेटी की शादी होने पर दामाद को चलाने के लिए दी। दामाद ने समझा सास ने गाड़ी गिफ्ट के रूप में दी है। अब सास, दामाद से गाड़ी वापस मांग रही हैं तो उसकी बेटी ही मां के खिलाफ हो गई है। सास का कहना है कि गाड़ी उनके नाम है। आरटीओ अधिकारियों ने मामले में हाथ खड़े कर दिए।
देवरानी और जेठानी में टकराव
केस-2
राजपुर चुंगी के एक परिवार में गाड़ी की वजह से क्लेश मचा हुआ है। देवर की मौत के बाद देवरानी ने गाड़ी को बेच दिया। इसकी जानकारी होने पर जेठानी ने आरटीओ कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराई। उसका आरोप है कि देवर की मौत के बाद गाड़ी के हकदार सास-ससुर है। आरोप है कि गाड़ी बेचने के लिए देवरानी सास-ससुर के स्थान पर अपने माता-पिता को आरटीओ कार्यालय लेकर पहुंची थी। देवरानी और जेठानी के बीच कार्यालय में जमकर कहासुनी हुई थी। इस मामले को आरटीओ अधिकारियों ने पुलिस के पास भेज दिया।
एक वाहन की दावेदार दो पत्नियां
केस-3
डेढ़ साल पहले आरटीओ में एक अजीब मामला आया था। एक दरोगा की मौत के बाद पत्नी ने चार पहिया वाहन बेच दिया। इसके कुछ दिन बाद दूसरी बीवी ने वाहन पर दावेदारी करते हुए आरटीओ कार्यालय में शिकायत की। दरोगा की दो पत्नियां होने की जानकारी पर मामले की जांच कराई गई, तो मालूम हुआ कि दरोगा ने बिना जानकारी के दूसरी पत्नी को रखा हुआ था। दरोगा की सर्विस बुक में पहली पत्नी का नाम दर्ज था। इसलिए उसे वाहन बेचने का अधिकार मिला।