मरीज हृदय की ही नहीं प्रोस्टेट, गभार्शय और घुटने की भी एंजियोग्राफी करा सकते हैं। वैस्कुलर सर्जरी ने जटिल ऑपरेशनों की संभावनाओं को भी कम कर दिया है। होटल ताज कन्वेंशन में आयोजित द वैस्कुलर सोसाइटी ऑफ इंडिया की कार्यशाला में शनिवार को मेदांता हॉस्पिटल के डॉ. राजीव परख ने इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कि प्रोस्टेट की समस्या होने पर यदि अधिक उम्र या अन्य किसी परिस्थिति से मरीज ऑपरेशन नहीं कराना चाहते हैं तो वैस्कुलर सर्जरी उनके लिए मददगार है।
पूना से आए डॉ. धनेश कामरेकर ने कहा कि गर्भावस्था के बाद करीब 30 प्रतिशत महिलाओं में रक्त नलिकाओं से संबंधित समस्या देखने को मिलती है। नसों की समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इससे गैंगरीन की समस्या बन सकती है, पैर की अंगुली से शुरू होकर कालापन पैरों में ऊपर तक पहुंचने लगता है।
गंगाराम हॉस्पिटल के डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होने से भी नसों की बीमारी हो सकती है। मई व जून में इस तरह की समस्या अधिक होती है। शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने डीप वेन थ्रोम्बोसिस के बारे में भी जानकारी दी। इसमें त्वचा के नीचे वाली नसें फूल जाती हैं। ब्लड नीचे से ऊपर नहीं आ पाता। 10 में से 6-7 महिलाओं को जीवनकाल में यह समस्या जरूर होती है। समस्या की अनदेखी करने पर नसें फट जाती हैं या रक्त जम जाता है। डॉक्टर के पास मरीज तब पहुंचता है जब जख्म बन जाता है और पस पड़ जाता है। पहले हिस्से को काटकर इलाज किया जाता था और अब लेजर से इलाज संभव है।