राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर राज्यसभा में सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि वंदे मातरम गीत देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की पहचान है। इस गीत को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा।
वंदे मातरम गीत देश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की पहचान है। इस गीत को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा। कन्हैया लाल माणिक लाल मुंशी और डॉ. आंबेडकर ने स्वीकार किया। पीएम का यह कहना गलत है कि सिर्फ देश के विभाजन के लिए इस गीत के टुकड़े हुए। यह बातें बुधवार को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी सांसद रामजी लाल सुमन ने कहीं।
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राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में चल रही बहस का हिस्सा बने सांसद सुमन ने कहा कि भारत के विभाजन के लिए मुस्लिम लीग और हिन्दू महासभा बराबर के दोषी हैं। देश के लोगों को ये जानना जरूरी है कि वर्ष 1940 में मुस्लिम लीग के लाहौर सम्मेलन में जिन्ना ने पाकिस्तान बनाने की मांग की थी। उससे पहले वर्ष 1937 में हिंदू महासभा सम्मेलन में सावरकर ने कहा था कि हमारे देश में हिंदू और मुसलमान दो राष्ट्र हैं।
भारत विभाजन के लिए जितना जिन्ना जिम्मेदार है, उतने ही सावरकर भी। इस गीत के दो शुरुआती छंंदों में राष्ट्र की वंदना है। कांग्रेस अधिवेशनों में यह गीत गाया जाता था। लाला लाजपत राय ने वर्ष 1905 में वंदे मातरम के नाम से उर्दू भाषा में एक दैनिक अखबार निकाला था। सुमन ने कहा भारतीय जनता पार्टी प्रत्येक विषय को सांप्रदायिक रंग देना चाहती है। इस देश में अंतिम रूप से यह तय हो जाना चाहिए कि गांधी का रास्ता सही है या सांप्रदायिक शक्तियों का।