ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि नए गठन तक निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में काम करेंगे। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्य बाधित नहीं होंगे, हालांकि उनके अधिकार सीमित रहेंगे।
ग्राम पंचायतों का पांच वर्ष का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। हालांकि, नई पंचायतों के गठन तक गांवों में कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए शासन ने सोमवार को ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से जिले के 690 ग्राम प्रधानों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
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प्रमुख सचिव पंचायतीराज अनिल कुमार की ओर से सोमवार को शासनादेश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि नई ग्राम पंचायतों की प्रथम बैठक के लिए नियत तिथि तक या अधिकतम छह माह की अवधि के लिए जो भी पहले हो निवर्तमान प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। जिलाधिकारियों को प्रशासक नामित करने के लिए प्राधिकृत किया गया है। प्रधान संगठन के मंडल अध्यक्ष अनीस चाहर ने कहा कि प्रधानों को प्रशासक बनाने की मांग सरकार से की गई थी। खुशी है कि सरकार ने मांगों पर ध्यान दिया।
अधिकार होंगे सीमित
प्रशासक के रूप में निवर्तमान प्रधानों के अधिकार सीमित रहेंगे। वे केवल ग्राम पंचायतों के सामान्य कार्यों का ही निर्वहन करेंगे। वह कोई नया नीति विषयक निर्णय नहीं ले सकेंगे। यदि कोई अत्यंत आवश्यक और विशेष स्थिति उत्पन्न होती है, तो नीतिगत फैसले से जुड़े प्रस्ताव जिला पंचायतराज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे और उनकी स्वीकृति के बाद ही लागू होंगे। ग्राम प्रधान अनुज कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव होने तक प्रशासनिक कामकाज बिना किसी बाधा के चलता रहेगा।