मैनपुरी। जिले में 40 प्रतिशत सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं हो सकी है। ऐसे में किसानों को परेशानी हो रही है। कुल संचालित 58 समितियों में से केवल 34 समितियों पर ही यूरिया उपलब्ध है, जबकि 24 पर स्टॉक निल है।
जिले में बड़े पैमाने पर धान और मक्का की खेती की जाती है। वर्तमान में दोनों ही फसलों में यूरिया डाली जा रही है। ऐसे में यूरिया की किल्लत और कालाबाजारी की सूचना पर शासन सख्त हो गया है। जिले भर में अभियान चलाकर इसकी जांच की जा रही है। वहीं कृषि विभाग व अन्य अधिकारियों को सभी जगह यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के आदेश दिए गए हैं। इसके बाद अब तक जिले में सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में इन क्षेत्रों के किसानों का निजी दुकानों से ही यूरिया खरीदनी पड़ रही है। विभागीय अधिकारी समितियों से मांग आने और धनराशि जमा कराने के बाद पीसीएफ (प्रादेशिक कॉपरेटिव फेडरेशन) स्टॉक से यूरिया भेजने की बात कह रहे हैं।
उधार मिलती है यूरिया
समितियों पर यूरिया उपलब्ध न होने वाले ऐसे किसानों को भी परेशानी हो रही है, जिनके पास धनराशि नहीं है। दरअसल सहकारी समिति से किसानों को उधार में उर्वरक और बीज मिलते हैं। फसल कटने पर उन्हें ये धनराशि जमा कराना पड़ती है। लेकिन समितियों पर यूरिया उपलब्ध न होने के चलते किसानों को निजी दुकानदारों से कैश में यूरिया लेनी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें परेशानी हो रही है।
दो दिन पहले आया है स्टॉक
जिले में दो दिन पहले ही कृभको यूरिया का तीन हजार मीट्रिक टन का स्टॉक आया है। इसमें से सहकारिता विभाग को 1700 मीट्रिक टन का आवंटन किया गया है। वहीं कुछ स्टॉक पहले से भी उपलब्ध है। इसके बाद भी समितियों पर यूरिया की कमी लापरवाही नहीं तो और क्या है।
हाईलाइर्ट्स
-58 हैं जिले में सहकारी समितियां
-34 पर ही उपलब्ध है यूरिया
-4900 एमटी है यूरिया का पीसीएफ के पास स्टॉक
-21 हजार एमटी है जिले में कुल यूरिया की उपलब्धता
समितियों पर डिमांड आने के बाद पीसीएफ द्वारा यूरिया भेजी जाती है। विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। समिति के सचिवों को डिमांड भेजने के साथ ही धनराशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे जल्द यूरिया भेजी जा सके।
अंकिता उप्रेती, एआर कॉपरेटिव।