श्री एकरसानंद आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में यज्ञ में आहुतियां देते छात्र और शिक्षक। स्रोत विद्
मैनपुरी। श्री एकरसानंद आदर्श संस्कृत महाविद्यालय मैनपुरी में चल रहे द्वि-दिवसीय वसंत पंचमी महोत्सव का सोमवार को समापन हो गया। अंतिम दिन महाविद्यालय में मां सरस्वती का विधिवत पूजन किया गया। श्री रामचरितमानस का अखंड पाठ भी किया गया।
महाविद्यालय में विभिन्न जनपदों के पांच बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार महाविद्यालय के आचार्यों के द्वारा किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामबदन पांडेय ने छात्रों को संस्कृत, वेद, व्याकरण और उपनिषदों की महत्ता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार के बाद हमें संयमित और नैतिक जीवन व्यतीत करना होता है। यज्ञोपवीत सेे आयु, बल, बुद्धि, और संपत्ति बढ़ती है।
इस संस्कार से कर्तव्य ,सदाचार, आत्मसंयम, और कर्मठता जैसे जीवन मूल्यों का पालन करने की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर श्री एकरसानंद संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. गयाप्रसाद दुबे, प्रधानाचार्य नीरज दुबे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समस्त पूजन विधि यथा विहित नियमानुसार डॉ. विजय कुमार शुक्ल और डॉ. अशोक कुमार पांडेय द्वारा संपादित कराया गया। इस अवसर पर डॉ. कल्पना ,डॉ. महेश कुमार द्विवेदी, डॉ. अभिषेक कुमार तिवारी, डॉ. सुशील कुमार, राजकमल सिंह चौहान, काव्यांशी मिश्रा, देशबंधु गुप्ता, श्याम दीक्षित, कृष्णदत्त मिश्र मौजूद रहे।