मथुरा में शिक्षक भर्ती घोटाले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। एसटीएफ की जांच में अभी तक 108 फर्जी शिक्षक पाए जा चुके हैं, जबकि 50 शिक्षकों का रिकार्ड और संदिग्ध लग रहा है।
इसकी जांच विभाग के साथ ही एसटीएफ भी कर रही है। इन सभी से शिक्षक बनाने के नाम पर 15-15 लाख रुपये लिए गए थे। वहीं 2016 में परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 12460 शिक्षकों की भर्ती निकली थी।
इसमें मथुरा में 216 पदों पर भर्ती होनी थी लेकिन यहां 32 शिक्षक अपात्र रख लिए गए थे। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इस भर्ती में भी मोटी रकम का लेनदेन हुआ था।
30 करोड़ से ज्यादा का खेल
जांच अधिकारियों का मानना है कि फर्जी भर्तियों के नाम पर 30 करोड़ से भी ज्यादा की रकम वसूली गई है। जो फर्जी शिक्षक गिरफ्तार हुए थे उन्होंने भी पूछताछ के दौरान बताया था कि सभी ने 15-15 लाख रुपये दिए थे।
वहीं यह रैकेट जाली प्रमाण पत्र पर भी 50 हजार रुपये तक ले रहा था। फर्जी प्रमाण पत्र भी 150 बनाए गए हैं। जांच एजेंसियों को जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक इस रैकेट से जुड़े कई लोगों ने कुछ ही दिनों में अपने कॉलेज तक खोल लिए हैं।
एसटीएफ ने जो फर्जी शिक्षक पकड़े हैं या जिनकी तलाश की जा रही है। उन्होंने शिक्षक बनने के मोटी रकम दी थी। महिलाओं के जेवर तक गिरवी रख दिए गए। किसी ने अपनी जमीन गिरवी रख दी थी। बैंक से लोन लिया।
फर्जी शिक्षकों में ज्यादातर महिलाएं
फर्जी शिक्षकों में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। 108 फर्जी शिक्षकों में 50 से अधिक महिलाएं हैं। इन महिलाओं को शिक्षक बनाने के लिए परिवार वाले कर्जदार हो गए हैं। नौकरी चल रही थी तो कर्ज लिया पैसा किश्तों में चुका रहे थे।
अब तो फर्जी शिक्षकों की नौकरी ही चली गई। जेल जाना और पड़ेगा। रैकेट को जो पैसा दिया गया वो भी मिलने से रहा। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि जो फरार हैं सभी की गिरफ्तारी की जाएगी।