निजी स्कूलों की मनमानी पर डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने सख्त रुख अपनाया है। हर साल मनमानी फीस बढ़ोतरी, यूनिफाॅर्म में बदलाव और स्कूल की ब्रांडिंग का बोझ अब अभिभावकों पर नहीं पड़ेगा। यह निर्णय बुधवार को जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में हुआ। डीएम ने शैक्षिक सत्र 2025-26 में फीस वृद्धि और यूनिफाॅर्म बदलने वाले स्कूलों की सूची 15 दिन में जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर से तलब की है।
अभिभावक संगठनों ने बैठक में मिशनरी स्कूलों पर फीस में मनमानी के आरोप लगाए। कहा जो स्कूल हर साल फीस बढ़ा रहे हैं, उन्हें शिक्षा विभाग और प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। हर वर्ष उन स्कूलों में यूनिफाॅर्म बदल जाती है। फीस बढ़ जाती है। स्कूल का नाम लिखीं किताब और कॉपी अभिभावकों को जबरन खरीदनी पड़ रही हैं। स्कूल वैन में निर्धारित संख्या से ज्यादा बच्चों को ले जाने पर रोक लगाएं। समिति के सीए दीपेंद्र मोहन ने बताया एक्ट के अनुसार स्कूल पांच शैक्षिक सत्रों तक यूनिफाॅर्म नहीं बदल सकता। अध्यापन कर्मियों के मासिक वेतन में वृद्धि करने पर फीस पुनरीक्षण होगा। लेकिन, फीस में वृद्धि पांच प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
डीएम ने यूनिफाॅर्म और फीस के मानकों का सख्ती से पालन कराने और उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा जिन स्कूलों में फीस बढ़ाई और यूनिफाॅर्म बदली उनकी सूची में 15 दिन में उपलब्ध कराएं। डीएम ने कहा सभी स्कूल में फीस का ब्योरा नोटिस बोर्ड पर चस्पा करेंगे। भविष्य में कोई भी फीस वृद्धि और यूनिफाॅर्म में बदलाव समिति की अनुमति के बिना नहीं होगा।
समिति की लेटलतीफी पर जताई नाराजगी
डीएम अरविंद बंगारी ने जिला शुल्क नियामक समिति गठन में लेटलतीफी पर नाराजगी व्यक्त की। अभिभावक संगठन के दीपक सरीन और मनोज शर्मा ने कहा कि सत्र शुरू हुए तीन महीने बीत गए। मार्च अप्रैल में यह निर्णय हुए होते तो अभिभावकों पर स्कूलों की मनमानी का बोझ नहीं पड़ता। डीएम ने डीआईओएस चंद्रशेखर को समिति की नियमित बैठक कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।
आरटीई का मखौल... स्कूलों पर होगी कार्रवाई
बैठक में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का प्रवेश नहीं लेने वाले स्कूलों के विरुद्ध जुर्माना लगाने, मान्यता समाप्ति नोटिस और अन्य विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बीएसए जितेंद्र कुमार ने बताया कि निजी स्कूल आरटीई में बच्चों का प्रवेश नहीं दे रहे। कमजोर वर्ग के बच्चों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। ऐसे स्कूलों को नोटिस भी जारी किए। लेकिन, वह नोटिस का भी जवाब नहीं दे रहे। डीएम ने सीडीओ प्रतिभा सिंह को नियमित समीक्षा के निर्देश दिए।