वहीं, हिमिका ने 180वीं रैंक प्राप्त की है। उनके पति भी पीसीएस क्वालीफाई हैं और शादी के बाद उनके मार्गदर्शन व लगातार सपोर्ट से ही वह भी इस मुकाम तक पहुंच सकीं और अब खुद पीसीएस बन गई हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में यूपीएससी और पीसीएस को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस रहता है। इसके लिए लक्ष्य जरूरी है और निरंतर तैयारी कर जरूर सफलता मिलती है। उनके पिता परशुराम गौतम व्यवसायी और माता राजेश कुमारी गृहिणी हैं।
सीमित संसाधनों में तैयारी
बेलनगंज निवासी वैष्णवी शर्मा ने 57वीं रैंक हासिल कर नायब तहसीलदार पद प्राप्त किया। यह उनका दूसरा प्रयास था। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का नियमित अभ्यास सफलता की कुंजी रहा। उनके पिता ताराचंद शर्मा मेडिकल स्टोर संचालक और मां कंचन शर्मा गृहिणी हैं।
सेल्फ स्टडी से बनाई राह
सीताराम कॉलोनी, बल्केश्वर निवासी अदिति जैन ने 76वीं रैंक हासिल कर नायब तहसीलदार पद प्राप्त किया। यह उनका तीसरा प्रयास था। उन्होंने बताया कि उनका लक्ष्य यूपीएससी था, लेकिन निरंतर प्रयास से पीसीएस में सफलता मिली। पिता आदेश जैन प्रॉपर्टी ब्रोकर हैं और माता सविता जैन शिक्षिका हैं।
नौकरी के साथ की तैयारी
बाह के पडुआपुरा बिजौली गांव निवासी सुनहरीलाल ने लेखा अधिकारी पद प्राप्त किया। उनके पिता मुन्नीलाल किसान हैं। वर्तमान में सुनहरीलाल अलीगढ़ में जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी है।
24वीं रैंक से क्षेत्र का नाम रोशन
जगनेर क्षेत्र के विधोली रोड निवासी हरविंद्र सिंह गुर्जर ने यूपीपीसीएस परीक्षा में 24वीं रैंक हासिल की। उनके पिता प्रेम सिंह हर्षाना भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। पिता का कहना है कि बेटा शुरू से ही मेहनती और अनुशासित रहा है और उसने अपने लक्ष्य पर लगातार ध्यान बनाए रखा।
उत्कृष्ट प्रदर्शन से पाई सफलता
नगला पदी निवासी सौम्या कुलश्रेष्ठ ने भी यूपीपीसीएस 2024 में सफलता हासिल की है। उन्हें सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के पद पर नियुक्ति मिली है। उनके पिता दाऊ दयाल कुलश्रेष्ठ महिला कल्याण विभाग से सेवानिवृत्त हैं, जबकि माता आशा रानी कुलश्रेष्ठ गृहिणी हैं।
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