त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जारी आरक्षण पर सोमवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। अदालत ने 1995 को आधार वर्ष मानते हुए जारी किए आरक्षण को निरस्त कर दिया है। साल 2015 के आधार वर्ष के चक्रानुक्रम में अब नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। अदालत के फैसले के बाद निराश हो चुके लोगों में भी चुनाव लड़ने की उम्मीद बंधी है। आरक्षण सूची 27 मार्च तक जारी की जानी है।
2015 के आधार पर आरक्षण की प्रणाली होगी लागू
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण सूची में खामी को लेकर सरकार ने अपनी गलती मानी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण प्रणाली को लागू कर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि अजय कुमार की जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रितुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने आरक्षण की फाइनल सूची जारी करने पर रोक लगा दी थी और आरक्षण की प्रक्रिया पर सरकार और राज्य चुनाव आयोग से जवाब मांगा था।
मारहरा ब्लॉक की इस तरह बदलेगी तस्वीर
विकास खंड मारहरा में वर्तमान में 58 ग्राम पंचायतें है। जिनमें वर्ष 2015 में दस ग्राम पंचायतें अनुसूचित जाति को आरक्षित थी। यदि 2015 को आधार मान लिया गया तो ग्राम पंचायत हिम्मत नगर बझेडा, सुपैती, पिवारी, सिरसा बदन, धिरामई सवा पांच, नगला ख्याली, नगला श्याम, मिरहची, मेहनी सौरा, गिरौरा अनुसूचित जाति को आरक्षित हो सकती हैं।
पंचायत चुनाव 2021: आरक्षण व्यवस्था पर हाईकोर्ट के फैसले से कहीं खुशी तो कहीं मायूसी
अभी तक पांच वर्ष को आधार मानकर आरक्षण तैयार किया गया था लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद आरक्षण को साल 2015 का आधार मानकर तैयार किया जाएगा। 27 मार्च तक आरक्षण सूची तैयार की जानी है।
- आलोक कुमार प्रियदर्शी, जिला पंचायती राज अधिकारी