दशहरा के दिन मूर्ति विसर्जन के दौरान उटंगन नदी में डूबे गांव कुसियापुर के 13 लोगों में से विष्णु को ग्रामीणों को उसी दिन बचा लिया था। हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को खेरागढ़ के एक अस्पताल में भर्ती विष्णु ने दर्दनाक हादसे के बारे में बताया।
उनका कहना है कि जैसे ही वह नदी में मौजूद गड्ढे में गिरे तो पानी ने उछाल दिया और पीछे आ रहे भाई ने उनका हाथ पकड़ लिया। इसके बाद एक अन्य ग्रामीण की मदद से बाहर निकाला गया।
कम था नदी का जलस्तर
विष्णु ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान जब सब लोग नदी में उतरे तो जलस्तर काफी कम था। नदी का पानी लोगों की कमर तक आ रहा था। इसीलिए सभी आगे बढ़ते गए। किसी को अंदाजा नहीं था कि नदी में गहरा गड्ढा भी है। अचानक से एक व्यक्ति का गड्ढे में गिर गया। उसे बचाने के लिए सभी लोग गिरते चले गए। वह पीछे थे। गड्ढे में गिरते ही पानी ने उछाल दिया, पीछे आ रहे भाई ने हाथ पकड़ लिया। इसके बाद एक अन्य ग्रामीण की मदद से उन्हें बाहर लाया गया।
इस जगह पहले कभी नहीं किया था विसर्जन
विष्णु का कहना है कि जहां ग्रामीण गए थे, वहां पहले कभी मूर्ति विसर्जन नहीं हुआ था। पुलिस का भी इंतजाम नहीं था। उटंगन बरसाती नदी है, बारिश के बाद वह सूख जाती है। इसलिए खनन भी होता है। खनन के कारण ही वहां गहरा गड्ढा हो गया। इसका किसी काे अंदाजा नहीं था कि गड्ढा इतना गहरा होगा कि वह हादसे का कारण बन जाएगा।
उटंगन में रोका गया पानी, एनडीआरएफ-सेना का तलाशी अभियान जारी
उटंगन नदी में मूर्ति विसर्जन के दाैरान डूबे खेरागढ़ के गांव कुसियापुर के सात युवकों का चौथे दिन भी पता नहीं चल सका। रविवार को भी सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन दल (एनडीआरएफ) का तलाशी अभियान जारी रहा। युवकों की तलाश के लिए नदी की धारा को डूब क्षेत्र के बीच से नाला बनाकर दूसरी तरफ मोड़ा गया है। 250 मीटर के क्षेत्र में नदी का पानी कम करने के लिए अस्थायी बांध बनाया गया है। नाला बनाकर पानी निकाला जा रहा है। वहीं अपनों के इंतजार में परिवार के लोगों की आंखें पथरा गई हैं। घटनास्थल पर हजारों लोग डूबे हुए युवकों के निकलने के इंतजार में डेरा डाले हुए हैं।