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UP Encounter: 'छह हत्याएं करने के बाद ही शादी', असद गैंग में सदस्य बनने के लिए पूरी करनी होती हैं ये शर्तें

Mon, 10 Mar 2025 03:44 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

UP Mathura Encounter: मुठभेड़ में ढेर हुआ असद उर्फ फाती नाम और वेश बदलने में माहिर था। छैमार गिरोह में परंपरा है कि जब तक गैंग का सदस्य छह लोगों की हत्या नहीं करता तब तक उसका विवाह नहीं होता है। इतना ही नहीं गिरोह का सक्रिय सदस्य बनने के लिए भी यही शर्त रहती है। 
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UP Mathura Encounter - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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UP Crime News: मथुरा पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ असद उर्फ फाती और उसके साथी जिले में बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए ठहरे हुए थे। वह अपने मकसद में कामयाब होते इससे पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गए। अब पुलिस उसके भागे साथियों की गिरफ्तारी में दबिश देने में जुटी हुई है।
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थाना प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार शाही ने बताया कि छैमार गिरोह क्षेत्र में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए ठहरे हुए थे। वारदात स्थल के आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि फाती के साथियों की पहचान हो सके। 

इसके अलावा वह किस घर की रेकी कर रहे थे, इसकी भी जानकारी की कोशिश की जा रही है। थाने की एक टीम गिरोह के साथियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालने में लगी है। सुबह से रात तक 15 से अधिक स्थानों पर लगे सीसीटीवी फुटेज टीम ने खंगाले है। 
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कुछ सुराग भी हाथ लगे हैं, लेकिन अभी तक यह जानकारी नहीं हो सकी है कि गिरोह किस घर को अपना निशाना बनाने की फिराक में थे। मुठभेड़ के बाद वारदात स्थल पर फॉरेंसिक टीम भी पहुंच गई। फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य एकत्रित किए हैं। डॉग स्क्वायड की मदद से भागे बदमाशों की तलाश की जा रही है।
 
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वारदात करने से पहले आसपास के जिले में बनाते हैं ठिकाना
छैमार गिरोह जिस जिले में वारदात को अंजाम देता है, उसके पास के जिलों में पहले ही छिपने के लिए अपना ठिकाना बना लेता है। इसी कारण पुलिस को इनकी तलाश में परेशानी होती है। थाना प्रभारी निरीक्षक आनंद कुमार शाही ने बताया कि गैंग काफी खतरनाक है। 

 

डकैती और लूट के दौरान परिवार के किसी सदस्य को जिंदा नहीं छोड़ते हैं, ताकि कोई सबूत और गवाह इनके खिलाफ न मिले। मुठभेड़ में ढेर डकैत एक दर्जन से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चुका था। इसके साथ ही 20 से अधिक डकैती की वारदातों को अंजाम दिया था।
 

रस्सी के सहारे चढ़ते हैं छत पर फिर करते हैं घर में प्रवेश
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गैंग के सदस्य जिस घर में डकैती और लूट की वारदात करते थे। उस घर में रस्सी के सहारे चढ़कर छत तक जाते हैं। छत से सीढ़ियों से होते हुए घर के अंदर प्रवेश करते हैं। इसके बाद पूरा गैंग परिजनों को बंधक बना लेते है और डकैती की वारदात को अंजाम देता है।

 

वेश और नाम बदलने में माहिर था छैमार गैंग का सरगना
मुठभेड़ में ढेर हुआ असद उर्फ फाती नाम और वेश बदलने में माहिर था। गैंग के अन्य सदस्य भी इसी तर्ज पर काम करते हैं। वह भिखारी का वेश धारण कर पहले रेकी करते। इसके बाद रात को घर पर गैंग के साथ धावा बोल देते। गैंग के सदस्य धारदार हथियारों का ज्यादा प्रयोग करते हैं। मामला बिगड़ने पर ही तमंचा आदि का इस्तेमाल करते हैं।

डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि शातिर डकैत नाम और वेश बदलने में माहिर था। अभी तक उसके हापुड़ गढमुक्तेश्वर निवासी फाती उर्फ कदीम उर्फ असद उर्फ पहलवान उर्फ बबलू उर्फ मोनीस आदि नामों की जानकारी हुई है। उसके और नामों की भी जानकारी की जा रही है। बताया कि छैमर गैंग वारदात से पहले घर की रेकी करता है, इसके बाद वारदात को अंजाम देते हैं।

 

छह हत्याएं करने के बाद ही होती है छैमार गिरोह के युवाओं की शादी
छैमार गिरोह में परंपरा है कि जब तक गैंग का सदस्य छह लोगों की हत्या नहीं करता तब तक उसका विवाह नहीं होता है। इतना ही नहीं गिरोह का सक्रिय सदस्य बनने के लिए भी यही शर्त रहती है। 

 
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मुठभेड़ के बाद पुलिस सूत्रों के अनुसार इनका कोई एक ठिकाना नहीं होता है। कभी एक शहर में कभी दूसरे शहर में निवास करते हैं। जिस शहर में रहते हैं वहां के फर्जी कागजात बनवा लेते हैं। फर्जी आधार कार्ड समेत अन्य कागजों के कारण इन्हें पकड़ना भी मुश्किल होता है। गैंग में करीब 400 सदस्य हैं।


 
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