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यूपी का रण 2022: जो करेंगे जूता कारोबार की राह आसान, उनका रखेंगे मान, जानिए आगरा के उद्यमियों की 'मन की बात'

Tue, 11 Jan 2022 12:07 PM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

जूता इकाई संचालक दिलीप मित्तल ने बताया कि सोल, अपर, सॉल्यूशन समेत 56 तरीके के कच्चे माल के दाम पर नियंत्रण न होने, टैक्स की दरें बढ़ने और सरकारी स्तर पर सुविधाएं न मिलने से जूते की लागत बढ़ रही है। इससे चीन से आयात हो रहे जूते से मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है।
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जूता उद्योग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जो जनप्रतिनिधि जूते की राह आसान करेगा, उनका मान जूता उद्यमी इस चुनाव में रखेंगे। विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ताजनगरी में जूता कारोबार से जुड़े चार लाख से ज्यादा लोग अपनी ताकत दिखाने का मन बना चुके हैं। उद्यमियों और व्यापारियों ने कोरोना काल में रियायतें न मिलने और एक जनवरी से जीएसटी की दर 5 से बढ़ाकर 12 फीसदी कर देने पर नाराजगी जताई। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वह मतदान के दिन इसका इजहार कर देंगे। तीन जनवरी को कारोबार बंद करके वह सत्ता और सरकार में बैठे लोगों तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। 
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कच्चे माल से महंगा हो चुका जूता
आगरा में देश का 65 फीसदी जूता बनता है। तीन साल में जूते का कच्चा माल दो गुना तक हो चुका है। चमड़ा महंगा होने की मार निर्यातक भी झेल रहे हैं। इधर सिंथेटिक लेदर की उपलब्धता कम होने का असर भी घरेलू जूता उत्पादकों पर पड़ा है। आगरा के गली-मोहल्लों में घर-घर में हो रहे फुटवियर के काम करने वालों को कच्चे माल पर छाई महंगाई साल रही है। जूता इकाई संचालक दिलीप मित्तल ने बताया कि सोल, अपर, सॉल्यूशन समेत 56 तरीके के कच्चे माल के दाम पर नियंत्रण न होने, टैक्स की दरें बढ़ने और सरकारी स्तर पर सुविधाएं न मिलने से जूते की लागत बढ़ रही है। इससे चीन से आयात हो रहे जूते से मुकाबला करना मुश्किल हो रहा है।
 
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सरकार की जिम्मेदारी है उत्पाद को आगे बढ़ाए
एक जिला एक उत्पाद में जब फुटवियर को रखा गया है तो सरकार की जिम्मेदारी है कि अपनी ही योजना वाले उत्पाद को आगे बढ़ाए न कि नीचे गिराए। फुटवियर उद्योग कोरोना काल में बुरी तरह से बर्बाद हो रहा है। घरेलू उद्योग महंगे कच्चे माल, टैक्स से जूझ रहा है। चुनाव में व्यापारी अपने मन की करेंगे। - उपेंद्र सिंह लवली, अध्यक्ष, आगरा शू मैन्यूफैक्चरर्स एसो.
सुनवाई नहीं हो रही तो जनप्रतिनिधि बदलेंगे

हम जनप्रतिनिधि चुनते हैं ताकि प्रदेश और केंद्र स्तर पर अपनी समस्याएं दूर करा सकें, पर जब उनकी सुनवाई न की जा रही हो तो हमें अपने प्रतिनिधि को ही बदलना पड़ेगा। अजीब हाल है कि 4 लाख जूता कारीगरों, 25 हजार करोड़ के कारोबार की शिकायत ही नहीं सुनी जा रही। - धर्मेंद्र सोनी, अध्यक्ष, जूता दस्तकार संघ
चुनाव में व्यापारी अपनी ताकत दिखाएंगे
सात करोड़ की आबादी वाले प्रदेश के वित्तमंत्री की टैक्स हटाने की मांग मानी गई, लेकिन हमारे 22 करोड़ आबादी के वित्तमंत्री की बात अनसुनी कर दी गई। हम देश का 65 फीसदी जूता बनाते हैं। हमारी राह जो आसान नहीं कर पाएगा, उसका मान चुनाव में नहीं रखेंगे। व्यापारी अपनी ताकत दिखा देगा। - गागन दास रामानी, अध्यक्ष, आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन
अच्छी तरह परख कर चुनेंगे प्रतिनिधि

पांच साल में फुटवियर उद्योग को प्रदेश सरकार से कोई रियायत नहीं मिली जबकि सरकार का प्रोत्साहन मिलता तो आगरा की हिस्सेदारी और बढ़ती। अब समय है जब हम अच्छी तरह परख कर अपने प्रतिनिधि को चुनेंगे। - आकाश कुमार, रिटेलर
चुनाव में गुस्से का इजहार दिखेगा

पूरे 9 जनप्रतिनिधि सत्ताधारी पार्टी के जिताए। डबल इंजन की सरकार बनी पर हमारे हिस्से न कोरोना में राहत आई न ही उसके बाद। टैक्स और 5 से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया। चुनाव में गुस्से का असर दिखाई जरूर देगा। - अमन कुमार, रिटेलर
जो हमारी बात रखेगा उसे चुनेंगे

जूते की चमक बढ़नी चाहिए थी लेकिन आगरा की आवाज और जूते की चमक कम होती गई। इस चुनाव में व्यापारी ऐसे प्रतिनिधि को चुनेंगे जो सरकार के सामने ढंग से आवाज पहुंचा सके। - योगेंद्र कुमार, रिटेलर
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