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यूपी: 16 लाख रुपये देकर लगवाई बेटी की सरकारी नौकरी, वो भी ढाई महीने में ही चली गई; सच जान छूटे पसीने

Thu, 27 Aug 2026 08:39 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर पिता से 16 लाख रुपये लेकर बेटी को फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिए करीब ढाई महीने नौकरी कराई गई, बाद में नौकरी फर्जी निकली। पीड़ित की शिकायत पर विधायक के भाई-भाभी समेत छह लोगों के खिलाफ लोहामंडी थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई है, जबकि आरोपी पक्ष ने खुद भी ठगी का शिकार होने का दावा किया है।
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सांकेतिक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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 नौकरी की तलाश और बेहतर भविष्य के सपने अक्सर ठगों के लिए आसान शिकार बन जाते हैं। लोहामंडी थाना क्षेत्र में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। एक पिता ने अपनी बेटी और बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए जेवर गिरवी रखकर 16 लाख रुपये दिए। आरोपियों ने फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बेटी को ढाई महीने तक नौकरी कराई बाद में पल्ला झाड़ लिया। पीड़ित ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। खास बात है कि नामजद लोगों में भाजपा के एक विधायक के भाई और भाभी का भी नाम है।
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लोहामंडी तोता का ताल निवासी अमर सिंह कुशवाह ने पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से शिकायत की। उन्हें बताया कि 12 जनवरी को उनके बेटे पीयूष और बेटी वैशाली को सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि मंजू कुशवाह और उनके पति विजयपाल सिंह कुशवाह (जो स्थानीय भाजपा विधायक भगवान सिंह कुशवाह के भाई हैं) ने इस पूरी साजिश की नींव रखी। खुद को सरकारी अध्यापिका बताने वाली मंजू और सिरसागंज के राजेश कुमार बघेल (जिसने खुद को सरकारी महाविद्यालय का प्रधानाचार्य और लखनऊ सचिवालय तक पहुंच वाला बताया) ने मिलकर इसे अंजाम दिया।

 

उन्होंने बताया कि पहले 20 लाख में सौदा तय हुआ, जिसे बाद में घटाकर 16 लाख रुपये कर दिया गया। उन्होंने अपनी बेटी की शादी के और पुश्तैनी जेवर गिरवी रखकर 15 जनवरी को 7 लाख और 25 जनवरी को 6.50 लाख रुपये नकद दिए। आरोप है कि 21 जनवरी को राजेश बघेल वैशाली को इंदिरा भवन, लखनऊ ले गया जहां उसे फर्जी नियुक्ति पत्र मिला।

22 जनवरी को उसकी ड्यूटी हाथरस जिला पंचायत कार्यालय में लगवा दी गई। वहां वैशाली ने करीब ढाई महीने तक ईमानदारी से काम किया। वेतन नहीं मिलने पर पूछा तो आरोपियों ने गोलमोल जवाब देते हुए उसका तबादला रायबरेली बता दिया।
 

इसके बाद 24 मार्च को उसे लखनऊ के गोमती नगर स्थित एक केंद्र ले जाकर फर्जी सर्विस बुक भी बनवा दी गई। 10 अप्रैल को जब वैशाली रायबरेली पहुंची तो वहां उसकी कोई नौकरी थी ही नहीं। इसी तरह बेटे पीयूष को भारतीय रिजर्व बैंक में नौकरी दिलाने के नाम पर भी 2.10 लाख रुपये नकद और 40,000 रुपये यूपीआई के जरिये ऐंठे गए।

 

मामले में आया नया मोड़
इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने अमर सिंह की तहरीर पर मंजू कुशवाह, विजयपाल सिंह कुशवाह, राजेश कुमार बघेल, योगेंद्र प्रताप सिंह बघेल, सुदेश कुमार और कुमारी अनुज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इस मामले में विधायक के भाई विजयपाल और उनकी पत्नी का पक्ष है कि मुख्य आरोपी राजेश बघेल और उसके साथियों ने उनके साथ भी एक करोड़ से अधिक की ठगी की है और वे खुद इस गिरोह के शिकार हुए हैं। वीडियो में पैसों के लेन-देन की जो बात सामने आ रही है, वह वास्तव में ठगी गई रकम को वापस मांगने की है।
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एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस टीम विस्तृत जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
 
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