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धर्मांतरण गिरोह: किस तरह जाल में फंसाई जाती हैं हिंदू लड़कियां, फिर घिनौना काम; MBA पास जतिन भी बन गया शिकार

Sat, 02 May 2026 09:29 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में कथित धर्मांतरण गैंग पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया और गेमिंग ऐप्स के जरिए युवाओं से संपर्क कर उन्हें प्रभावित करता था। पुलिस जांच में सामने आया कि गैंग कथित तौर पर ब्रेनवॉश कर लोगों को अपने नेटवर्क में शामिल करता था, मामले की जांच जारी है।
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पुलिस आयुक्त दीपक कुमार - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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धर्मांतरण गैंग के सदस्य सोशल मीडिया पर युवाओं से संपर्क करते थे। युवाओं को जाल में फंसाने के लिए उन्होंने गेमिंग एप्स को हथियार बना रखा था। गेम खेलने के दौरान युवाओं से बात की जाती थी। ग्रुप बनाकर गैंग के युवक और युवतियां पहले दूसरे धर्म की कमियां बताते थे। इसके बाद इस्लामिक साहित्य देकर आकर्षित करते थे। ब्रेनवाश कर धर्मांतरण कराने के बाद उन्हें गैंग में शामिल कर लिया जाता था।
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धर्मांतरण गैंग में शामिल जतिन कपूर उर्फ जाशिम एमबीए पास है। उसने पूछताछ में बताया कि पढ़ाई के दौरान ही उसकी इस्लाम में रुचि हो गई थी। वह धर्म परिवर्तन कर जाशिम बन गया था। पढ़ाई के बाद वह वेबसाइट डिजाइनिंग का काम करने लगा था। उसे इंटरनेट के बारे में अच्छी जानकारी थी। गैंग के सदस्यों को इंटरनेट इस्तेमाल करने में वह मदद करता था।

वह सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है। उसके इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक पर कई खाते बने हैं। इनके जरिये वह युवाओं के संपर्क में आता था। युवाओं को शिकार बनाने में सबसे ज्यादा गेमिंग एप्स का इस्तेमाल करता था। गेम खेलने के दौरान गैंग की सदस्य महिलाएं और युवक युवाओं से बातचीत कर उनका ब्रेनवाश करते थे। धर्म परिवर्तन के बाद दिल्ली भेजा जाता था। वहां नजर रखी जाती थी। कट्टर बनाने के बाद इन्हें भी गैंग में शामिल कर लिया जाता था।

मौलाना हसन करवाता था निकाह
युवती या युवक जो भी इनके जाल में फंसता था। मौलाना हसन उनका धर्म परिवर्तन कराता था। इसके बाद कूटरचित दस्तावेज बनाकर इनके निकाह कराने की जिम्मेदारी भी मौलाना हसन की रहती थी। हसन गैंग का पुराना सदस्य है और कलीम सिद्दीकी के संपर्क में रहता था। जाल में फंसने वाली युवतियों को जेहादी तकरीरें सुनाने के लिए वह दिल्ली और अन्य राज्यों में भी जाता था।  पुलिस के अनुसार लड़कियों को धर्म परिवर्तन के बाद विदेश जाने के लिए तैयार करते थे। हां बोलने पर तस्करी का खेल होता था।
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बारीकी से पढ़कर धर्म की निकालते थे कमियां
नॉर्थ दिल्ली का रहने वाला परवेज अख्तर भले ही सिर्फ बीए पास था। पर उसकी कई भाषाओं में पकड़ थी। वह इस्लामिक साहित्य तैयार करता था और उसकी लिखी किताबों का युवाओं का ब्रेनवाश करने में इस्तेमाल किया जाता था। इसके साथ ही वह दूसरे धर्मों की किताबें पढ़ता था। उनको पढ़ कर ऐसी कमियां निकालता था, जिनसे सामूहिक रूप से सवाल करने पर युवा कोई जवाब नहीं दे सके और धीरे-धीरे अपने धर्म से दूरी बनाने लगे।
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