आगरा के मूक-बधिर विद्यालय के छात्रों ने यूपी बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया कि हौसलों के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। 26 में से 24 छात्रों के पास होने के साथ कई ने प्रथम और द्वितीय श्रेणी में सफलता हासिल कर शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक मिसाल पेश की।
सुन नहीं सकते, बोल नहीं सकते लेकिन हौसलों की उड़ान ऐसी कि यूपी बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर चौंका दिया। विजय नगर स्थित संकेत राजकीय मूक बधिर विद्यालय के छात्रों ने 2026 के परिणाम में यह साबित कर दिया कि शारीरिक सीमाएं कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।
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विद्यालय के कुल 26 दिव्यांग छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें 9 ने प्रथम और 15 ने द्वितीय श्रेणी में सफलता हासिल की। हालांकि दो छात्र असफल रहे, लेकिन अधिकांश छात्रों का प्रदर्शन उम्मीद से कहीं बेहतर रहा। इन छात्रों की राह आसान नहीं थी। सुन और बोल नहीं पाने की चुनौती के साथ-साथ आर्थिक तंगी भी बाधा थी, लेकिन इशारों की भाषा को अपना माध्यम बनाकर उन्होंने सफलता की नई इबारत लिख दी।
विद्यालय की शिक्षिका पल्लवी तिवारी ने बताया कि इन बच्चों में सीखने की ललक मजबूत होती है। ये बौद्धिक रूप से काफी मजबूत होते हैं। बस सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। प्रधानाचार्या ममता सिंह ने इस सफलता का श्रेय छात्रों की मेहनत और उनके हौसले को दिया। उन्होंने कहा कि ये बच्चे हर दिन हमें सिखाते हैं कि जिंदगी में सबसे बड़ी ताकत आत्मविश्वास है।
चित्रकारी के शौक के साथ अमन बना टॉपर
विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले बाराबंकी के अमन ने 64.83% अंक हासिल किए। उनके पिता भरतराम खेती करते हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। अमन को चित्रकारी का शौक है और वह अंग्रेजी में भी रुचि रखते हैं। शिक्षिका पल्लवी ने बताया कि अमन बोलने का आत्मविश्वास विकसित करने के लिए लगातार प्रयास करते हैं और परीक्षा के दौरान भी लिखकर अपनी बात बताते थे।
नितिन ने 64.5% के साथ दूसरा स्थान पाया
नितिन कुमार ने 64.5% अंक प्राप्त कर विद्यालय में दूसरा स्थान हासिल किया। उनके पिता रामजीत इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाते हैं और मां पिंकी देवी गृहिणी हैं। भाई विशाल ने बताया कि नितिन शुरू से ही पढ़ाई में अच्छे रहे हैं। घर पर आने के दौरान वह बोलने और लिखने का लगातार अभ्यास करते थे। अब उनकी रुचि के अनुसार आगे की पढ़ाई कराएंगे।
संघर्ष के साथ प्रिंस ने पाया तीसरा स्थान
प्रिंस कुमार ने 63.8% अंक हासिल कर विद्यालय में तीसरा स्थान प्राप्त किया। पिता ज्ञानचंद ने बताया कि प्रिंस शुरू से ही पढ़ाई में रुचि रखते हैं और लगातार प्रयास करते हैं। बोलने और सुनने में असमर्थ होने के बावजूद प्रिंस ने लिखकर और अभ्यास के जरिए परीक्षा की तैयारी की। उन्हें चित्रकारी में विशेष रुचि है और इस प्रतिभा के लिए उन्हें बुलंदशहर के जिलाधिकारी ने सम्मानित भी किया था। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें लखनऊ भेजेंगे।