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एकरूपता की मिसाल ताजमहल, लेकिन ताजगंज प्रोजेक्ट में सब उल्टा-पुल्टा

Fri, 22 Jan 2016 02:23 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
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पूरी दुनिया में ताजमहल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है तो इसकी एकरूपता वास्तुविदें को प्रेरित करती रही है, लेकिन ताजमहल के पास 197 करोड़ रुपये के ताजगंज प्रोजेक्ट में अफसरों और आर्किटेक्ट के प्रयोगों ने इसे मजाक बना दिया है। लाइट हो या सड़क, फुटपाथ हो या बेंच, थोड़ी-थोड़ी दूरी पर इनके डिजायन बदल दिए गए हैं, वहीं ताज से शिल्पग्राम तक की महज 900 मीटर रोड में तीन तरह की सड़क बनाकर इसे भद्दा कर दिया गया है। लाल रंग की कंक्रीट, ग्रेनाइट और मेन गेट पर कोलतार की सड़क से ताज आने वाले पर्यटक इंजीनियरों और अफसरों की खिल्ली उड़ा रहे हैं।
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सत्ता की हनक के साथ बनाए जा रहे 197 करोड़ रुपये के ताजगंज प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की, लेकिन अफसरों और आर्किटेक्ट की मानसिकता फिर भी नहीं बदली। ताजमहल जहां एकरूपता की मिसाल है, वहीं ताजगंज प्रोजेक्ट को प्रयोगों के जरिए हर 100 मीटर पर भिन्न कर दिया गया है। प्रोजेक्ट में अभी 500 मीटर दायरे में कोवल स्टोन लगने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है, लेकिन एएसआई की आपत्ति के बाद रेड सैंड स्टोन लगाने की तैयारी की जा रही है। 500 मीटर से बाहर की सड़क कोवल स्टोन (ग्रेनाइट) से तैयार की जा चुकी है, जबकि शिल्पग्राम से आगे कंक्रीट में लाल रंग मिलाकर सैंड स्टोन के रंग से मैच करते हुए सड़क बनाई गई है।

इस तरह कुल 900 मीटर के हिस्से में यह सड़क तीन तरह की तैयार हुई है। फुटपाथ पर तीन डिजायन पहले ही बनाए गए थे, जिनमें से एक पुराने आर्कटेक्ट की देन है तो दो डिजायन नए के। इसी तरह लाइटों को एक डिजायन के साथ लगा दिया गया है, लेकिन एएसआई से इसकी डिजायन पर सुझाव मांगा है। एएसआई को चार सैंपल भेजे गए हैं। इसमें से किसी एक पर सहमति बनने पर फिर डिजायन बदले जाएंगे। लैंप पोस्ट, फुटपाथ से लेकर रेलिंग और बेंच तक के डिजायन हर 200 मीटर के बाद बदले हुए हैं। वास्तु और एकरूपता के लिहाज से प्रोजेक्ट को मजाक बना दिया गया है।
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