डा. बीआरए अंबेडकर यूनिवर्सिटी में फर्जीवाड़े की जांच पहले से चल रही है। हाईकोर्ट की निगरानी में एसआईटी के 55 अफसर फाइलें खंगाल रहे हैं। लेकिन अब राज्यपाल राम नाईक ने सख्त रवैया अपनाया है तो इसके खास मायने हैं। एसआईटी की जांच में सिर्फ लिपिकों पर गाज गिरी है। अब आला अफसरों का नंबर आ सकता है। मुमकिन है कि राज्यपाल जांच कराने के लिए लखनऊ से अफसरों की टीम भेजें।
राज्यपाल के पास तमाम ऐसी शिकायतें पहुंची हैं, जिन पर जवाब देना विवि. अधिकारियों के लिए बहुत मुश्किल है। सबसे ताजा मामला मूल्यांकन का है। हाईस्कूल और इंटर कालेजों के शिक्षकों से बीए और एमए की कॉपियां चेक कराई गईं, किसके आदेश से? एक परीक्षक ने 30 में से 33 अंक दे दिए। ऐसे प्रोफेसर लगाए गए जो फंड की स्पेलिंग नहीं लिख पाए। गलती पकड़ में आ गई फिर भी कार्रवाई नहीं की गई।
हजारों शिकायतें मार्कशीट में गड़बड़ी की हैं। कई ऐसे मामले आए जिनमें आनलाइन मार्कशीट में पहले सेकेंड डिवीजन थी। दोबारा अपलोड की गई तो फर्स्ट हो गई। विवि के अफसरों के सामने मामला आया, जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। एसआईटी जो जांच कर रही है, वह बीएड के 2004 से 2009 के सत्र में 25 हजार फर्जी मार्कशीट बेचे जाने का मामला है। इसमें 83 कालेज संचालकों की गर्दन फंसी है। एफआईआर अफसरों के खिलाफ भी है, लेकिन अभी तक कार्रवाई सिर्फ तीन लिपिकों पर हुई है।
घोटालों की पीडीएफ लगाएं:
चार नवंबर 2015: विवि की जाली मार्कशीट से विदेशों में नौकरियां- मैन बुक पहला पेज
सात नवंबर 2015: आठवीं पास को बना दिया एमबीबीएस- माई सिटी
11 दिसंबर 2015: बीएड में सात हजार फर्जी छात्र- मैन बुक पहला पेज
13 जनवरी 2016: अब विवि से एमबीबीएस चार्ट गायब- मैन बुक पहला पेज
31 जनवरी 2016: विवि की मार्कशीट-डिग्री कचरे के ढेर में मैन बुक पहला पेज
चार मई 2016: अब विवि में आनलाइन फर्जीवाड़ा-माय सिटी
सात जून 2016: कैसे मिले डिग्री, 9500 चालान गायब- माय सिटी
मूल्यांकन की पीडीएफ
17 जून: अरे ये क्या 33 में से दे दिए 37 नंबर- माय सिटी पेज पांच
29 जून: स्नातक की कापियां जांचने आया इंटर स्कूल का शिक्षक