स्थायी नियुक्ति का मामला, कर्मचारियों की सुरक्षागार्ड से हुई भिड़ंत
गेट फांदकर पहुंचे अंदर, दिया धरना, पुलिस ने संभाला
संविदाकर्मियों को स्थायी करने की मांग लिए डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय कर्मचारियों ने खंदारी कैंपस में हंगामा किया। अंदर प्रवेश करने से रोकने पर कर्मचारियों की सुरक्षागार्डों से भिड़ंत हो गई। धक्का-मुक्की होने लगी। कई कर्मचारी गेट फांदकर अंदर कूद गए और वीसी निवास की ओर बढ़ने लगे। यहां तैनात पुलिस ने कर्मचारियों को रोक लिया। इससे आक्रोशित कर्मचारी वहीं धरने पर बैठ गए। पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कर्मचारियों की मांग के बारे में बताया। कुलसचिव ने उनकी मांगें मान लेने की बात कही। इस पर कर्मचारी मान गए, लेकिन अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि लिखित में आश्वासन और धरना स्थल पर कर्मचारियों का अनशन समाप्त कराए बिना विश्वविद्यालय में कामकाज नहीं होने दिया जाएगा। बता दें बुधवार से कर्मचारी शासनादेश का हवाला देकर 2001 के पहले से कार्यरत संविदाकर्मियों को स्थायी करने की मांग के लिए अनशन किए हुए हैं। शनिवार से विश्वविद्यालय में तालाबंदी भी कर दी। कोई सुनवाई न होते देख सभी कर्मचारी एकजुट होकर खंदारी कैंपस स्थित वीसी आवास का घेराव करने पहुंचे थे।
विवि अधिकारियों के खिलाफ सभी हुए लामबंद
विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ समाजवादी छात्र सभा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, सेल्फ फाइनेंस कालेज एसोसिएशन एक साथ आ गए। समाजवादी छात्र सभा कर्मचारियों का समर्थन किया। परिषद के कार्यकर्ताओं ने छात्र समस्याओं का हवाला देकर गेट पर धरना दिया। प्राइवेट कालेज संचालकों ने छात्रों की मार्कशीट न मिलने जैसी समस्याएं रखीं।
स्थायी होंगे विश्वविद्यालय के 61 संविदाकर्मी
विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने की संस्तुति, शासन को भेजेंगे लिस्ट
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के संविदा कर्मचारियों को बड़ी सौगात मिली है। कार्य परिषद ने दिसंबर 2001 से पहले संविदा पर कार्यरत 61 कर्मचारियों को स्थायी करने पर मुहर लगा दी है। लाभार्थियों की रिपोर्ट और संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। दरअसल, कर्मचारी संविदाकर्मियों को स्थायी करने की मांग के लिए छह दिन से भूख हड़ताल पर हैं। कर्मियों ने शनिवार से विश्वविद्यालय में तालाबंदी कर दी।
सोमवार को खंदारी कैंपस में कुलपति आवास पर कार्य परिषद की बैठक हुई। इसमें कुलपति की ओर से गठित कमेटी ने संविदाकर्मियों के विनियमितीकरण पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें 61 संविदा कर्मचारियों के कार्य को संतोषजनक पाया गया। जिन 15 कर्मचारियों का कार्य संतोषजनक नहीं था, कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल ने कमेटी को उनका पुन: परीक्षण करने के निर्देश दिए। मीटिंग में कुलपति की सर्च कमेटी के लिए एक सदस्य का नाम तय हुआ। ये कई विश्वविद्यालयों के कुलपति रह चुके हैं। कमेटी गोपनीय रहती है, जिसमें चीफ जस्टिस और राज्यपाल की ओर से भी एक-एक सदस्य नामित रहता है। पीआरओ डा. जीएस शर्मा ने बताया कि शासनादेश के मद्देनजर संविदाकर्मियों का विनियमितीकरण किया जाएगा। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि कर्मचारियों को स्थायी करने की संस्तुति कर उसे शासन को भेजा जाएगा। मीटिंग में प्रो. राजेंद्र शर्मा, डा. बृजेश रावत, डा. आशा अग्रवाल, डा. बहादुर सिंह, डा. संजय चौधरी आदि रहे।
सीएम के लिए अभद्र भाषा पर भड़का गुस्सा, हंगामा
चीफ प्राक्टर के खिलाफ थाना न्यू आगरा मेें दी तहरीर, जांच शुरू
डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर डा. मनोज श्रीवास्तव पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगा है।
संविदा कर्मियों को स्थायी करने की मांग के लिए आंदोलनरत कर्मचारियों के समर्थन में सपा नेत्री कुंदनिका शर्मा कुलपति से मिलने खंदारी कैंपस पहुंची। कुलपति आवास पर कार्य परिषद की बैठक चल रही थी। मुख्य गेट पर सुरक्षागार्ड ने सपा नेत्री, छात्र सभा के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को अंदर नहीं जाने दिया। चीफ प्राक्टर ने मीटिंग का हवाला देकर सपा नेत्री को परिसर में नहीं आने दिया। नेत्री ने उनसे पूछा कि संविदाकर्मियों को स्थायी करने के मुख्यमंत्री के आदेश पर क्या कार्रवाई हुई? आरोप है कि इस पर चीफ प्राक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री का आदेश नहीं मानता, इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इस पर छात्र सभा के सदस्य भड़क गए और हंगामा कर दिया। सपा नेत्री ने डीएम पंकज कुमार को मामले से अवगत कराया है। डीएम के निर्देश पर पहुंचे एसीएम द्वितीय अरुण कुमार ने कुलसचिव से उनकी वार्ता कराई। विश्वविद्यालय कर्मचारी अध्यक्ष अखिलेश चौधरी ने चीफ प्राक्टर के खिलाफ थाना न्यू आगरा में तहरीर दी है। चीफ प्राक्टर डा. मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि उन पर लगे आरोप असत्य हैं। इंस्पेक्टर न्यू आगरा ने बताया कि जांच कर कार्रवाई की जाएगी।