चार टीमें करेंगी परीक्षा की निगरानी
विश्वविद्यालय की ओर से मुख्य परीक्षाओं की निगरानी के लिए चार वरिष्ठ शिक्षकों प्रोफेसर यूसी शर्मा, प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर, प्रोफेसर बिंदुशेखर शर्मा, प्रोफेसर भूपेंद्र स्वरूप शर्मा की एक-एक टीम बनाई जाएगी। इनके साथ एक-एक सहायक कुलसचिव और अन्य शिक्षक होंगे।
ये टीमें सभी जिलों में लगातार निगरानी करेंगी। यह सुनिश्चित करेंगी कि किसी भी परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र 30 मिनट से पहले ना पहुंचे। परीक्षा केंद्रों को सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कंट्रोल रूम से जुड़वाना सुनिश्चित करेंगे। प्रोफेसर वीके सारस्वत और प्रोफेसर मनु प्रताप सिंह भी लगातार नियंत्रण कक्षों से नोडल केंद्रों पर खुलने वाले प्रश्नपत्रों की निगरानी करेंगे।
नोडल केंद्रों पर आरएफआईडी लॉक लगाए जाएंगे
प्रभारी कुलपति ने कहा कि सभी नोडल केंद्रों पर अत्याधुनिक तकनीक से युक्त रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) लॉक लगाए जाएंगे। आरएफआईडी की डिजिटल तकनीक में नोडल केंद्र के स्ट्रांग रूम में और बाहर दो-दो वीडियो कैमरे लगाए जाते हैं। स्ट्रांग रूम से बाहर लगने वाले इस लॉक पर एक इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होगी, जिसका कंट्रोल रूम विश्वविद्यालय में होगा।
विश्वविद्यालय से कमांड दिए जाने पर ही स्ट्रांग रूम का ताला खुलेगा। डिजिटल लॉक की सुविधा होने से विश्वविद्यालय का सभी नोडल केंद्रों पर नियंत्रण सुनिश्चित हो जाएगा। विश्वविद्यालय की ओर से प्रयास किया जा रहा है कि सभी नोडल केंद्रों से भेजी जाने वाली टैक्सियों में जीपीएस की सुविधा उपलब्ध रहे, इसकी निगरानी विश्वविद्यालय के दोनों नियंत्रण कक्षों से की जाएगी ।
नोडल केंद्र के अध्यक्ष के पास ही रहेगा मोबाइल
बैठक में निर्णय लिया गया कि आगामी परीक्षाओं में सिर्फ नोडल केंद्र अध्यक्षों के पास ही मोबाइल की सुविधा उपलब्ध होगी, इसके अलावा नोडल केंद्र पर किसी भी अन्य शिक्षक अथवा कर्मचारी के पास मोबाइल प्रतिबंधित रहेगा।
पुलिस की रिपोर्ट के बाद परीक्षा निरस्त करने पर निर्णय होगा
विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने बताया कि बीएससी द्वितीय वर्ष की रसायन विज्ञान विषय की परीक्षा को निरस्त करने के संबंध में पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद निर्णय लिया जाएगा। पुलिस जब यह कह देगी कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले आउट हो गया था।