इससे फर्जीवाड़ा के दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि रिपोर्ट में कुछ बिंदू जांच से छूट गए हैं, इसमें जांच करने वाले सेवानिवृत्त जज ने दस्तावेज न मिलने की बात कही थी, इस पर उनको जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं। इन बिंदुओं पर जांच होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
ये है मामला
बीएड 2012-13 में 18 हजार से अधिक छात्रों ने परीक्षा थी। इसमें मूल्यांकन कराने वाले पैनल में शामिल वरिष्ठ प्रोफेसरों ने अधिकारियों की सांठगांठ कर निजी कॉलेजों के साढ़े छह हजार से अधिक छात्रों को मनमाने अंक दे दिए। इसमें प्राप्तांकों के मुकाबले दोगुना तक अंक दिए। चार्ट और फॉइल भी गायब करा दी। छात्र संगठनों ने भी आंदोलन किया और इसके बाद 2015-16 में सेवानिवृत्त जज से जांच करवाई।