न ड्राइविंग लाइसेंस न सत्यापन
परिवहन निगम की गाइडलाइन के मुताबिक, स्कूल वाहन के चालक को कम से कम पांच साल का अनुभव होना चाहिए। उसके ड्राइविंग लाइसेंस की जांच होनी चाहिए। उनके चरित्र का सत्यापन किया जाना चाहिए। कोरोना काल के तीन साल के दौरान चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच और चरित्र सत्यापन नहीं कराया गया है। आरटीओ (प्रवर्तन) केडी सिंह का कहना है कि स्कूलों के चालकों के लाइसेंस की जांच और सत्यापन नहीं कराए गए हैं। पुलिस इन चालकों का सत्यापन करके रिपोर्ट की एक प्रति आरटीओ में जमा कराएगी।
15 साल पुरानी बसें चलाईं तो मान्यता समाप्ति की कार्रवाई
आरटीओ (प्रवर्तन) ने बताया कि चेकिंग के दौरान आयु पूरी कर चुकीं स्कूल बसों को बच्चों को लाने ले जाने में प्रयोग पाया गया है। स्कूल प्रबंधक, प्रधानाचार्य इस तरह की बसें संचालित नहीं करें। यदि ऐसी बसें संचालित होते पकड़ी गईं तो निरोधात्मक कार्रवाई के साथ ही संबंधित स्कूल की मान्यता को समाप्त करने की सिफारिश शिक्षा विभाग से की जाएगी।
45 स्कूली वाहनों के चालान
आरटीओ ने बताया कि प्रवर्तन टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं। बृहस्पतिवार को भी 45 स्कूली वाहनों का चालान किया गया। फिटनेस, मानकों की अनदेखी, चालक के पास लाइसेंस नहीं होने जैसी खामियों पर कार्रवाई की गई।