नगर निगम बोर्ड को दो साल पूरे हो रहे हैं। इन दो सालों में स्वच्छता का दावा किया गया है, लेकिन शहर की हर गली, हर सड़क पर कूड़े के ढेर लगे हैं। कागजों पर तो सफाई पूरी है, लेकिन हकीकत में मंदिर, मस्जिद, चर्च, स्कूल, हास्पीटल के पास ही सफाई नहीं हो रही है।
हर दिन कूड़े को उठाने की जगह तीन से चार दिन में उठवाया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के नाम पर नगर निगम के अफसर योजनाएं बना कर भारी भरकम बजट खर्च कर चुके हैं, जिनमें घरों से कूड़ा उठाने की योजना (डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन), अंडरग्राउंड डस्टबिन समेत कई योजनाएं फेल साबित रही हैं।
शहर के 100 वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए चार कंपनियों के पास जिम्मेदारी है, लेकिन जब सत्यापन हुआ तो खुलासा हुआ कि महज पांच घरों से कंपनियों ने कूड़ा उठाया, पर नगर निगम ने भुगतान पूरे 100 घरों का किया।
एत्माउद्दौला पर कूड़े के ढेर
- फोटो : अमर उजाला
बजट की कमी से जूझ रहे नगर निगम में 25 करोड़ रुपये का भुगतान एक साल में चारों कंपनियों को कर दिया गया। नगर निगम सदन में पार्षदों ने सबूत के साथ जब हंगामा किया तो तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी गई, लेकिन उसकी रिपोर्ट ढाई महीने बाद भी नहीं आई है। निगम के अफसर जांच रिपोर्ट को महीनों तक लटकाने की साजिश में जुटे हैं।
बजट को ठिकाने लगाया
घरों से कूड़ा लेने की योजना में बड़े पैमाने पर नगर निगम के बजट को ठिकाने लगाया गया है। इसकी जांच रिपोर्ट जल्द आनी चाहिए ताकि कंपनियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जल्द कड़ी कार्रवाई की जा सके - प्रकाश केशवानी, पार्षद, ट्रांस यमुना
खराब छवि लेकर जा रहे पर्यटक
मेरे क्षेत्र से होकर विदेशी मेहमान कछपुरा, महताब बाग तक जाते हैं, लेकिन यहां सफाई बेहद खराब है। नाली का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और कूड़ा उठाने की नियमित व्यवस्था नहीं है। सफाई न होने से विदेशी पर्यटक शहर की खराब छवि लेकर जा रहे हैं - हरीमोहन, पार्षद, मोती महल
आगरा के मेयर नवीन जैन
शहर में सफाई को लेकर चिंतित हूं
सवाल: स्वच्छता का संकल्प दिला रहे हैं, पर शहर में सफाई नहीं हो रही
जवाब: दो साल से मैने प्रयास किया है कि लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़े, इसलिए हर प्रोग्राम में स्वच्छता की शपथ दिलाता हूं। शहर में सफाई को लेकर चिंतित हूं। उस स्तर की सफाई व्यवस्था नहीं हो रही है, जैसी मैं चाहता हूं।
सवाल: डोर टू डोर हो या अंडरग्राउंड बिन योजना, दोनों ही फेल हो गईं
जवाब: फेल तो नहीं हैं, पर इनमें कमियां जरूर हैं। डोर टू डोर में कंपनियों द्वारा की गई गड़बड़ी की जांच तीन सदस्यीय कमेटी से करा रहे हैं। अंडरग्राउंड डस्टबिन बनाए पर अब सबक लेते हुए पूरे शहर को डस्टबिन फ्री बना देंगे। एक साल का समय इसमें लगेगा।
सवाल: मंदिर, मस्जिद हर गली पर कूड़ा है, जबकि मॉनीटरिंग के लिए अफसर हैं। कार्रवाई क्यों नहीं होती
जवाब: धर्मस्थलों के पास विशेष सफाई के निर्देश हैं। जहां नहीं हो रही है, उसकी शिकायत लोग मुझे करें, सफाई जरूर होगी। कमियों को दूर करके स्वच्छ आगरा बनाने का सपना है, जिसके लिए 12 को रैली के जरिए लोगों को जागरूक कर रहा हूं। - नवीन जैन, मेयर, आगरा