अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से एक दिन पहले समाज का कुरूप चेहरा भी देखने को मिला। दो साल की बच्ची को बृहस्पतिवार की सर्द रात बालूगंज स्थित अनाथालय के बाहर छोड़ दिया गया। वह वाकर में बैठी अपनों की राह देख रही थी। उसके कपड़े पोटली में बांधकर रखे गए थे। चाैकीदार अमर सिंह ने आश्रम प्रबंधन को जानकारी दी। पुलिस ने बच्ची को बालगृह में आश्रय दिलाया।
ठीक से नाम भी नहीं बता पा रही मासूम
थाना रकाबगंज के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि रात 9 बजे पुलिस को सूचना दी गई कि प्रेम सदन आश्रम के गेट पर एक बच्ची मिली है। वह अपना नाम नहीं बता पा रही है। ठीक से बोलने में भी असमर्थ है। आश्रम में 10 से 15 साल तक के अनाथ लड़कों और 10 से 18 साल की अनाथ लड़कियों को आश्रय दिया जाता है। मगर, छोटे बच्चों को नहीं रखा जा सकता है। इसलिए पुलिस पहुंच गई। बच्ची चलने में भी असमर्थ लग रही थी। महिला पुलिसकर्मी बच्ची को गोद में उठाकर शाहगंज स्थित बालगृह ले आई। बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने के बाद आश्रय दिलाया गया।
आखिर काैन हैं माता-पिता?
पुलिस ने बताया कि बच्ची के माता-पिता काैन हैं? यह पता किया जा रहा है। इसके लिए आश्रम के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे जा रहे हैं। बच्ची को यहां इस तरह छोड़कर जाने के पीछे क्या कारण है, यह भी परिजन की पहचान होने पर ही पता चलेगा। उसे कहां से लेकर आया गया? बच्ची के अस्वस्थ होने की आशंका है, इस वजह से ही उसे छोड़ा गया होगा।