मामले में थाना प्रभारी अरुण कुमार ने पांच जुलाई-2014 को आरोपपत्र दाखिल किया। बृहस्पतिवार को अदालत ने राजीव अग्रवाल और उसके साथी संतोष कुमार को दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मुकदमे में पैरवी कर अभियुक्तों को दंड दिलाने के लिए कोर्ट पैरोकार प्रेम कुमार और कोर्ट मोहर्रिर सिपाही पप्पू खान को एसएसपी ने एक-एक हजार रुपये से पुरस्कृत किया।
एडीजीसी शशि शर्मा ने बताया कि घटना के समय राजीव और सीमा का बेटा सौरभ (उस समय उम्र 12 वर्ष) और बेटी श्रुति (उस समय उम्र छह वर्ष) भी घर में थे। पति ने बेटे सौरभ को बांध दिया था। सीमा की हत्या के बाद श्रुति को अपने साथ ले गया था। अदालत में दोनों बच्चों ने पिता के खिलाफ गवाही दी जो कि सजा दिलाने में अहम रही।
प्राइवेट नौकरी करने वाले राजीव अग्रवाल और सीमा से तीन बच्चे थे। विवाद होने पर सीमा तीनों बच्चों को लेकर तेज नगर में रहने लगी थी। राजीव मुगल रोड स्थित लश्करपुर में किराए पर रह रहा था। घटना वाले दिन राजीव ने सीमा को अपने कमरे पर बुलाया।
किसी बात पर पति-पत्नी में झगड़ा हो गया। तब राजीव का साथी भी वहां था। टीवी की आवाज तेज करके राजीव ने अपने साथी के साथ मिलकर सीमा की कैंची, चाकू और मोगरी से हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों भाग गए थे। पड़ोस के किराएदारों ने पुलिस को सूचना दी थी।
देश-दुनिया और अपने क्षेत्र की हर खबर सबसे पहले पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप हमें फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फॉलो भी कर सकते हैं।