आलू बीज वितरण में धांधली पर शासन ने शनिवार को जिला उद्यान अधिकारी (डीएचओ) बैजनाथ सिंह और उप निदेशक (डीडी) उद्यान धर्मपाल यादव को निलंबित कर दिया। बीज वितरण प्रभारी संजीव यादव और लिपिक सुनील कुमार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। धांधली की जांच के लिए शासन से आई तीन सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
जिले में 4300 क्विंटल आलू का प्रमाणित सरकारी बीज किसानों में वितरण के लिए आवंटित हुआ था, लेकिन किसानों को बीज नहीं मिला। अवैध रूप से बीज व्यापारी व कोल्ड स्वामियों को बेच दिया गया। उद्यान विभाग में हुए इस भ्रष्टाचार का अमर उजाला ने पर्दाफाश किया था। मामले का संज्ञान लेते हुए डीएम अरविंद एम बंगारी ने प्रमुख सचिव को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद विशेष सचिव देवेंद्र कुशवाह के नेतृत्व में तीन सदस्य टीम जांच के लिए आगरा आई थी।
टीम ने दो दिन डीएचओ, उद्यान निरीक्षक, लिपिक से पूछताछ की। जांच में बीज वितरण में लापरवाही और अनियमितताएं सामने आईं। जांच टीम की रिपोर्ट पर उद्यान निदेशक भानु प्रकाश राम ने 6 नवंबर को सहायक उद्यान निरीक्षक एवं बीज वितरण प्रभारी संजीव यादव को निलंबित किया था। दूसरी कार्यवाही उप निदेशक धर्मपाल यादव ने कनिष्ठ सहायक सुनील कुमार को निलंबित कर की थी।
संयुक्त निदेशक उद्यान बीपी राम ने बताया कि शनिवार को डीएचओ बैजनाथ सिंह और उप निदेशक उद्यान धर्मपाल सिंह को शासन ने निलंबित कर दिया है। दोनों के विरुद्ध विस्तृत जांच के लिए शासन स्तर से एक कमेटी गठित की जा रही है। आलू बीज वितरण में प्रदेश में यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इसमें अब तक चार लोग निलंबित हो चुके हैं। वहीं, किसानों का कहना है कि बीज वितरण में हुए भ्रष्टाचार पर निलंबित अधिकारियों व कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। किसानों के लिए आया बीज कहां गया, पुलिस जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
5 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक ब्लैक में बिका बीज
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि उद्यान विभाग के अधिकारियों ने अच्छी गुणवत्ता का बीज 3 से 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक ब्लैक में बेचा है। इस तरह बड़े पैमाने पर बीज वितरण में धांधली हुई। किसान विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन करते रहे, लेकिन उद्यान अधिकारी मूक-बधिर बन रहे। बिना लिखा-पढ़ी, रजिस्टर में एंट्री हजारों क्विंटल बीज वितरण का फर्जीवाड़ा हुआ है।
घटिया गुणवत्ता के बीज से नुकसान
राष्ट्रीय लोकदल के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर ने बताया कि तीन तरह का बीज मिलता है। सीड साइज को उद्यान अधिकारी ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। सीड साइज की जगह किसानों को ओवरसाइज बीज बांटा जाता है, जबकि ओवरसाइज बीज खरीदने वालों को बंपर साइज बीज का वितरण होता है। बंपर व ओवरसाइज बीज से बीज की लागत बढ़ जाती है। वहीं घटिया गुणवत्ता के बीज से अच्छी पैदावार नहीं होती है।